खंडहर है अमूल्य धरोहर

संवाददाता, बिहारशरीफ (नालंदा) .प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर शीघ्र ही विश्व धरोहर में शामिल होगा. इसके लिए संयुक्त रूप से प्रयास किया जा रहा है. ये बातें विश्व धरोहर के निदेशक सत्यभामा बद्रीनाथ ने सोमवार को प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर का निरीक्षण करने के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से राजगीर के […]
संवाददाता, बिहारशरीफ (नालंदा) .प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर शीघ्र ही विश्व धरोहर में शामिल होगा. इसके लिए संयुक्त रूप से प्रयास किया जा रहा है. ये बातें विश्व धरोहर के निदेशक सत्यभामा बद्रीनाथ ने सोमवार को प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर का निरीक्षण करने के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से राजगीर के कन्वेंशन हॉल में सोमवार से दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हो रही है. इस कार्यशाला में विभिन्न विद्वानों से नालंदा खंडहर से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी. अधीक्षण (पुरातात्विक) एमएस चौहान एवं यूनिवर्सिटी ऑफ नालंदा की कुलपति डॉ गोपा सबरबाल ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के इतिहास, उसमें पढ़नेवाले छात्रों, शिक्षकों एवं अध्ययन के विषय के बारे में विश्व धरोहर के निदेशक को विस्तृत जानकारी दी. इस मौके पर सहायक अधीक्षण (पुरातात्विक) केसी श्रीवास्तव, नालंदा खंडहर के प्रभारी क्रिस्टो सहित अन्य लोग आदि मौजूद थे. नालंदा खंडहर का भ्रमण करने के बाद सत्यभामा बद्रीनाथ ने कहा कि नालंदा खंडहर भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है.
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