नानी बनने के बाद भी नहीं मिली नागरिकता

Updated at : 06 Aug 2015 12:30 AM (IST)
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नानी बनने के बाद भी नहीं मिली नागरिकता

30 वर्षो से भारतीय नागरिकता की कानूनी प्रक्रिया से जूझ रहा है शहला परिवार हर दो वर्ष में बढ़वाना पड़ता है वीजा बिहारशरीफ : शहला प्रवीण हिन्दुस्तान में रहते-रहते नानी तक बन गयी, लेकिन आज भी वे हिन्दुस्तान की नागरिकता से वंचित हैं. भले ही वह पाकिस्तान की रहने वाली है, लेकिन दिन हिंदुस्तान में […]

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30 वर्षो से भारतीय नागरिकता की कानूनी प्रक्रिया से जूझ रहा है शहला परिवार
हर दो वर्ष में बढ़वाना पड़ता है वीजा
बिहारशरीफ : शहला प्रवीण हिन्दुस्तान में रहते-रहते नानी तक बन गयी, लेकिन आज भी वे हिन्दुस्तान की नागरिकता से वंचित हैं. भले ही वह पाकिस्तान की रहने वाली है, लेकिन दिन हिंदुस्तान में है.
उनके शौहर शकील अनवर इसलिए शहला प्रवीण से शादी की थी कि भारत और पाकिस्तान मुल्क के बीच उनका पारिवारिक रिश्ता बना रहे. शादी के तीस साल के बाद भी भारतीय नागरिकता नहीं मिला है. नागरिकता दिलाने के लिए पति-पत्नी तीस साल से दिल्ली से लेकर जिला प्रशासन का दरबाजा खटखता रहे है. तीस साल पहले वर्ष 1984 में पाकिस्तान के करांची निवासी अहिया खान की पुत्री शहला प्रवीण की शादी बिहाशरीफ शहर के कटरापर मोहल्ले के निवासी के इलियास खान के पुत्र शकील अनवर के साथ हुई थी. तब से लेकर अब तक भारतीय नागरिकता के लिए कार्यालयों का दौड़ लगा रहे है.
दोनों परिवार का आना जाना कायम रखने के लिए की गयी थी शादी: शकील अनबर व शहला प्रवीण बताते है उनके परिजनों ने इस उद्देश्य से शादी किया था कि दोनों परिवार के लोगों का आना-जाना जारी रहे. वे बताते है कि आजादी के पहले दोनों मुल्क एक था. इस संस्कृति को देखते हुए भी शादी रचायी गयी थी. वे बताती है कि इनके छह पुत्री व दो पुत्र है. बड़ी पुत्री की शादी के बाद उसकी भी पुत्री हो गयी है.
नानी बन गयी है फिर भी नागरिकता नहीं मिली है इसका मलाल है. नागरिकता नहीं मिलने के लिए सरकार के कानूनी प्रक्रिया को दोषी ठहराते हुए कहते है कि नागरिकता नहीं मिलने के कारण स्टेट से बाहर जाने के पहले एसपी कार्यालय को सूचना देना पड़ता है. हर दो साल में बढ़ाना पड़ता है वीजा: नागरिकता नहीं मिलने की स्थिति में हर दो साल में शहला की वीजा बढ़ाना पड़ता है वीजा बढ़ाने के लिए दिल्ली व पटना स्थित गृह मंत्रलय में दौड़ लगाना पड़ रहा है.
छह साल में नागरिकता मिलने का है प्रावधान: शहला व शकील बताते है कि शादी के तीन साल के बाद दोनों परिवार के लोग भारत पाकिस्तान आ जा सकते है.शादी के छह साल के बाद नागरिकता दिये जाने का प्रावधान है. लकिन जटिल प्रक्रिया के कारण तीस साल लग गये है लकिन नागरिकता नहीं मिला है.
दर्जनों लोगों को नहीं मिली है नागरिकता: बिहारशरीफ के रहने वाले वैसे एक दर्जन पुरुष है जिनकी शादी पाकिस्तान में हुई है. शहर के भैसासुर निवासी फिरोज खान की शादी भी पाकिस्ताल के करांची निवासी शबनम जफर से हुआ है. शादी के 18 वर्ष के बाद भी शबनम को भी भारत की नागरिकता नहीं मिली है.
दहशतगर्दियों का कोई मजहब नहीं- शहला प्रवीण: शहला बताती है कि दोनों देश एक ही था. यही कारण है कि दोनों देशों की संस्कृति में काफी समानता है. खान-पान में भी अंतर नहीं है.
बह बताती है कि अभी जो आतंकवाद का मसला है दोनों देश में एक सी स्थिति है. बह बताती है कि वर्ष 2013 में करांची गयी थी. वहां भी मजिस्द व अन्य जगह धमाके होते रहते है. दहशत फैलाने वाले का कोई धर्म नहीं होता है.
बह बताती है राजनीतिकरण के कारण दोनों देश में एकता कायम नहीं हो पा रहा है. दूसरे देश अमरीका समेत अन्य देश के लोग भी नहीं चाहते है कि दोनों देश में मित्रता बहाल हो.
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