भवन व शिक्षक के बिना इंटरमीडिएट में नामांकन

Updated at : 09 Dec 2014 11:46 AM (IST)
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भवन व शिक्षक  के बिना इंटरमीडिएट में नामांकन

बिहारशरीफ/बेन (नालंदा) : बेन प्रखंड अंतर्गत सरदार बल्लभ भाई पटेल +2 विद्यालय में भवन और शिक्षकों के अभाव में इंटरमीडिएट की पढ़ाई बाधित हो रही है. विद्यालय को 2012 ई. में ही प्लस टू की स्वीकृति आनन-फानन में विभाग द्वारा प्रदान तो कर दी गयी, लेकिन न तो इसके लिए भवन की व्यवस्था की गयी […]

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बिहारशरीफ/बेन (नालंदा) : बेन प्रखंड अंतर्गत सरदार बल्लभ भाई पटेल +2 विद्यालय में भवन और शिक्षकों के अभाव में इंटरमीडिएट की पढ़ाई बाधित हो रही है. विद्यालय को 2012 ई. में ही प्लस टू की स्वीकृति आनन-फानन में विभाग द्वारा प्रदान तो कर दी गयी, लेकिन न तो इसके लिए भवन की व्यवस्था की गयी और न तो शिक्षकों की नियुक्ति ही की गयी है.
विद्यालय में चालू सत्र से ही विभागीय फरमान पर नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. यहां कला और विज्ञान विषयों में अब तक 40 विद्यार्थियों द्वारा नामांकन भी कराया गया है, लेकिन शिक्षकों तथा भवन के अभाव में विद्यार्थी और अभिभावक आशंकित है. विद्यालय की छात्र सीमा कुमारी ने बताया कि यहां नामांकित अधिकांश विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए आसपास के कोचिंग संस्थानों पर निर्भर है. छात्र क्षितिज प्रकाश ने बताया कि +2 विद्यालय गंगटी में आसपास के कई गांवों बारा, बालचंद बिगहा, कुतलुपुर, शिकरी पर, धोबड़ी आदि के छात्र पढ़ने आते हैं, लेकिन वर्ग कक्ष तथा शिक्षकों की कमी से उन्हें मायूसी के सिवा कुछ नहीं मिलता है.
अभावों के बीच भी अनुशासन का माहौल
विद्यालय में व्याप्त कई महत्वपूर्ण समस्याओं के बावजूद यहां का अनुशासन तथा शैक्षणिक वातावरण अच्छा है. समय पर विद्यालय का खुलना, बच्चों का स्कूल ड्रेस में होना तथा कक्षाओं में शिक्षकों की मौजूदगी से विद्यालय परिसर अपनी स्थिति प्रदर्शित कर रहा था. बच्चों का शांतिपूर्वक कक्षाओं में मौजूदगी से लग रहा था कि यदि यहां की समस्याओं का विभाग द्वारा निराकरण कर दिया जाय तो यह जिले के अच्छे विद्यालयों में शामिल हो सकता है.
इंटरमीडिएट का भवन अधूरा व माध्यमिक का भवन जीर्ण-शीर्ण :
विद्यालय का इंटरमीडिएट भवन कई वर्षो से जहां अधूरा पड़ा है, वहीं माध्यमिक विद्यालय के कई कमरे ध्वस्त हो चुके हैं. विद्यालय के मात्र 4 कमरों में 418 नामांकित विद्यार्थियों को पढ़ाना विद्यालय की मजबूरी है. वैसे तो विद्यालय में नौ शिक्षकों की नियुक्ति है, लेकिन हिंदी तथा विज्ञान विषयों के शिक्षक यहां नहीं है. इससे विद्यार्थियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. कई अभिभावक अपने बच्चों के अच्छे रिजल्ट के लिए उन्हें आसपास के ट्यूशन सेंटर तथा कोचिंग संस्थानों में नामांकन कला कर पढ़ाई की कमी को पूरा कराने में लगे हैं. गंगटी गांव के कई ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग को बिना व्यवस्था के इंटरमीडिएट की पढ़ाई शुरू नहीं करानी चाहिए थी.ये बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.
खेल का मैदान बना चारागाह
गंगटी +2 विद्यालय के पास कुल छह एकड़ 15 दिसमिल अपनी जमीन है. लेकिन विद्यालय की चहारदीवारी नहीं रहने के कारण यह मवेशियों का चारागाह बना हुआ है. अक्सर ग्रामीणों के मवेशियों के मैदान में घुसे रहने के कारण यहां विद्यार्थियों के लिए खेलना मुश्किल है. विद्यालय की छात्र चंदा कुमारी का कहना है कि एक तो मैदान समतल नहीं है, उपर से गाय-भैंसों के मैदान में चहलकदमी से विद्यार्थी मैदान में टहलने से भी परहेज करते हैं.
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