पीड़ित महिलाओं को मिलेगा न्याय: सांसद

Updated at : 03 Jan 2018 1:02 AM (IST)
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पीड़ित महिलाओं को मिलेगा न्याय: सांसद

तीन तलाक चाहे वह मौखिक हो या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिया हो, अवैध होगा बिहारशरीफ : नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि रूढ़िवाद से पीड़ित महिलाएं जो सामाजिक कुरीतियों में जकड़ी हैं, उन्हें न्याय दिलाने का वक्त आ चुका है. उन्होंने कहा है जिस तरह से शरीर में नाड़ी न हो तो खून […]

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तीन तलाक चाहे वह मौखिक हो या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिया हो, अवैध होगा

बिहारशरीफ : नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि रूढ़िवाद से पीड़ित महिलाएं जो सामाजिक कुरीतियों में जकड़ी हैं, उन्हें न्याय दिलाने का वक्त आ चुका है. उन्होंने कहा है जिस तरह से शरीर में नाड़ी न हो तो खून का संचार बंद हो जायेगा, ठीक उसी प्रकार समाज में नारी न हो तो समाज का निर्माण बंद हो जायेगा. ये बातें सांसद कौशलेंद्र लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2017 पर सांसद में चर्चा में भाग लेते हुए की.
उन्होंने कहा कि आज इस सदन में महिला अधिकारों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. उन्होंने प्रधानमंत्री व कानून मंत्री को इसके लिए बधाई देते हुए कहा कि सभी पार्टियों को एक स्वर से इस बिल का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि तलाक इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है. इसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता.
अत: शरियत कानून 1937 की धारा-2 में दी गयी एक बार में तीन तलाक की मान्यता असंवैधानिक है. अत: जैसा इस विधेयक में प्रावधान है कि तीन तलाक चाहे वह मौखिक हो या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिया गया हो, वह अवैध होगा. यह स्वागत योग्य कदम है और इसके माध्यम से समुदाय विशेष की महिलाओं के प्रति होने वाले शोषण पर लगाम लगेगा.
उन्होंने कहा कि केवल धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर तीन तलाक, निकाह, हलाला और बहू विवाह की इजाजत भारतीय संविधान कतई नहीं देता है और न ही पवित्र कुरान में तीन तलाक का संहिताकरण किया गया है. यह तो केवल उलेमाओं द्वारा मनमाफिक व्याख्या है.
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