कुपोषण से बचाव को दें पौष्टिक आहार
Updated at : 21 Dec 2017 4:51 AM (IST)
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भूई में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन राजगीर : बच्चों में समय से पूरक आहार की शुरूआत नहीं करने एवं उसके उम्र के अनुसार आहार नहीं देने से नाटेपन की समस्या उत्पन्न हो रही है. बिहार राज्य में लगभग 48 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के कारण नाटे हैं. उक्त बातें जीविका के ब्लॉक हेल्थ नियूटेशन मैनेजर राजीव […]
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भूई में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
राजगीर : बच्चों में समय से पूरक आहार की शुरूआत नहीं करने एवं उसके उम्र के अनुसार आहार नहीं देने से नाटेपन की समस्या उत्पन्न हो रही है. बिहार राज्य में लगभग 48 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के कारण नाटे हैं. उक्त बातें जीविका के ब्लॉक हेल्थ नियूटेशन मैनेजर राजीव रंजन सिंह ने बुधवार को प्रखंड के भूई पंचायत के भुई गांव में आंगनबाड़ी सेविका, ग्राम संगठन, और जीविका दीदी के सहयोग से निकाले गये जन जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कही. रैली में शामिल लोगों के द्वारा गृह भ्रमण कर लोगों को पूरक अर्थात ऊपरी आहार के महत्व को समझाया. कुपोषण के कारण होने वाले नाटेपन को दूर कर बच्चों का शारीरिक, मानसिक विकास सही समय पर हो सके इसे लेकर खाद्य समूह पर भी चर्चा की गयी.
हेल्थ मैनेजर राजीव रंजन सिंह ने कहा कि बच्चों को सात खाद्य समूह में से कम से कम चार खाद्य समूह अवश्य दिया जाना चाहिए. उन्होनें कहा कि वर्तमान में राज्य में बच्चों व महिलाओं के बीच कुपोषण एक बड़ी समस्या है. कुपोषण मुक्त बिहार के लिए आहार एवं व्यवहार में परिवर्तन जरूरी है.उन्होंने कहा कि बच्चों में नाटेपन के कारण मानसिक विकास में कमी होती है, जिसके कारण बच्चों में पढने-लिखने की क्षमता में कमी आती है. बिहार में 100 में 31 बच्चों को ही उचित समय पर पूरक आहार मिल पाता है. बच्चों को सही पोषण के लिए छह माह तक केवल मां का दूध एवं उसके बाद पूरक आहार की भी शुरूआत करनी चाहिये. स्तनपान कम से कम 24 माह तक निश्चित रूप से कराना चाहिए.उन्होंने कहा कि छह माह के बाद बच्चों को पूरक आहार में अनाज ,कंद-मूल ,फली एवं छिलके वाले दाल, दूध उत्पाद, मांस मछली एवं मुर्गा, अंडा विटामिन ए युक्त फल एवं सब्जी, व अन्य फल एवं सब्जियां दी जानी चाहिए. इस अवसर पर बीपीएम जीविका करूण शंकर, एलएचएस अल्का कुमारी, बीसीएम स्वास्थ विभाग संजय कुमार,जीविका सीसी शालिनी कुमारी मौजूद थे.
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