सकी अमर की मौत की गुत्थी नामजद विद्यालय संचालक अब भी पुलिस की पकड़ से दूर

Updated at : 20 Dec 2017 1:23 AM (IST)
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सकी अमर की मौत की गुत्थी नामजद विद्यालय संचालक अब भी पुलिस की पकड़ से दूर

बिहारशरीफ : सात वर्षीय अमर की मौत की गुत्थी आज भी नालंदा पुलिस के लिए रहस्य बनी हुई है. मामले की जांच कर रही पुलिस भी कुछ विशेष बोलने से बच रही है. केवल अनुसंधान का हवाला दिया जा रहा है. छात्र की मौत की सही जानकारी फिलहाल किसी के पास नहीं है. स्कूल की […]

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बिहारशरीफ : सात वर्षीय अमर की मौत की गुत्थी आज भी नालंदा पुलिस के लिए रहस्य बनी हुई है. मामले की जांच कर रही पुलिस भी कुछ विशेष बोलने से बच रही है. केवल अनुसंधान का हवाला दिया जा रहा है. छात्र की मौत की सही जानकारी फिलहाल किसी के पास नहीं है. स्कूल की संचालिका शीला कुमारी छात्र की खुदकुशी करने की बात बता रही हैं.

वहीं, मृतक के अभिभावक स्कूल संचालक पर हत्या करने का आरोप पुलिस के समक्ष लगाया है. वहीं, मामले की जांच कर रही पुलिस चुप्पी साध रखी है. छात्र की मौत व इससे जुड़े तथ्यों पर नजर दौड़ाएं तो कहीं न कहीं इस मामले की कड़ी स्कूल प्रबंधक के नकारात्मक रुख को परिभाषित करता है. स्कूल की संचालिका ने मीडिया को दिये बयान में स्वीकारा है

कि अमर पिछले कुछ दिनों से डिप्रेशन में चल रहा था. अगर सही में अमर अपने आवासीय विद्यालय में अवसाद में चल रहा था तो क्यों नहीं इसकी जानकारी अभिभावकों को दी गयी. उसका समुचित इलाज क्यों नहीं कराया गया. कुछ ऐसे अनसुलझे प्रश्न हैं, जो अमर की मौत पर सवालिया निशान लगा रहे हैं.

छत से कैसे कूद सकता है सात वर्ष का मासूम : लोगों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि आखिर सात वर्ष का बालक कैसे स्कूल की छत से कूद सकता है. कहीं ऐसा तो नहीं कि छात्र को छत से कूदने को लेकर किसी ने उकसाया हो. जिस स्थान से छात्र के छलांग लगाने की बात बतायी जा रही है, वह स्थान सात वर्षीय बालक के पहुंचने लायक नहीं है. छत चारों ओर से घिरा है. पुलिस की जांच टीम को भी इस बात पर संशय है. सदर एसडीपीओ निशित प्रिया ने बताया है कि घटना के बाद से ही सर्वांगीण बाल विकास आवासीय विद्यालय के संचालक व कांड में नामित सूर्यमणी प्रसाद फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी को लेकर निरंतर छापेमारी की जा रही है. उनकी गिरफ्तारी के बाद ही इससे जुड़े तमाम प्रश्नों की जानकारी मिल सकती है.
उठ रहे सवाल
आवासीय विद्यालय से नीचे छलांग लगाने वाले छात्र का शव नीचे कीचड़ में ही क्यों गिरा बताया गया.
छात्र अगर 45 फुट ऊंची चार मंजिला आवासीय भवन से नीचे गिरा तो उसकी बॉडी पर खरोंच क्यों नहीं आयी.
सदर अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार इतने ऊपर से गिरने पर बॉडी के कई पार्ट्स टूट जाने चाहिए.
छात्र की बॉडी जब अस्पताल आयी तो चिकित्सकों ने क्यों छत से कूदने की बात पर संदेह उत्पन्न किया.
पूरे मामले पर संदेह उत्पन्न करते हुए चिकित्सकों ने क्यों उसके बिसरा को प्रिजर्व कर लिया.
अमूमन बिसरा को तब प्रिजर्ब किया जाता है, जब मामला संदिग्ध होता है.
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