एक-एक अधिकारी संभाल रहे दो-दो पदों की कमान

Updated at : 18 Dec 2017 7:55 AM (IST)
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एक-एक अधिकारी संभाल रहे दो-दो पदों की कमान

काम के बोझ से दुबे हैं अधिकारी स्वास्थ्य योजनाओं की गति मिले तो कैसे बिहारशरीफ. सेहत की सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य योजनाओं से लोगों को लाभान्वित करने के लिए सरकार आये दिन ठोस कदम उठाने में जरूर लगी है. सरकार की कोशिश है कि सुलभ तरीके से स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ आमलोगों को प्राप्त हो […]

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काम के बोझ से दुबे हैं अधिकारी
स्वास्थ्य योजनाओं की गति मिले तो कैसे
बिहारशरीफ. सेहत की सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य योजनाओं से लोगों को लाभान्वित करने के लिए सरकार आये दिन ठोस कदम उठाने में जरूर लगी है. सरकार की कोशिश है कि सुलभ तरीके से स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ आमलोगों को प्राप्त हो सके.
विडंबना ही कहे कि नालंदा जिला स्वास्थ्य महकमा में इन दिनों एक-एक अधिकारी संभाल रहे दो-दो महत्वपूर्ण पदों की कमान. यूं कहे कि काम के बोझ से दबे हैं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी. एेसी स्थिति में जिले में स्वास्थ्य योजनाओं की गति कैसे मिल पायेगी.
नालंदा स्वास्थ्य विभाग में प्रोग्राम अफसरों का टोटा: नालंदा जिला स्वास्थ्य महकमा में इन दिनों प्रोग्राम अफसरों का टोटा है. प्रोग्राम अफसरों के महत्वपूर्ण पद महीनों से खाली पड़े हैं.
लिहाजा कार्यों का बोझ पदस्थापित अधिकारियों पर अतिरिक्त रूप से पड़ रहा है. लिहाजा अधिकारियों की कमी से स्वास्थ्य योजनाओं की गति देने में परेशानी उठानी पड़ रह रही है. चाहकर भी स्वास्थ्य योजनाओं की गति नहीं मिल पा रही है. यानि की अधिकारियों के टोटे से समय पर कार्यों का निष्पादन नहीं हो पा रहा है. फाइलों को निबटाने से लेकर योजनाओं की गति देने में दिक्कतें हो रही हैं. जिला स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों की कमी से मौजूद अधिकारियों के टेबुल पर फाइलों की अंबार लग जा रही है.
सिविल सर्जन ही संभाल रहे एसीएमओ का पद : जिला स्वास्थ्य महकमा में सिविल सर्जन के बाद अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी का पद दूसरे स्थान पर है.अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी का पद भी काफी महत्वपूर्ण है. लेकिन पिछले करीब दो माह से यह पद जिले में खाली पड़ा हुआ है.
तत्कालीन एसीएमओ डॉ ललित मोहन प्रसाद प्रोन्नति पाकर छपरा सिविल सर्जन बन गये हैं. तब से यह पद रिक्त है. सरकार की ओर से अब तक इस पद पर किसी की पदस्थापना नहीं की गयी है. लिहाजा एसीएमओ स्तर से होनी वाली योजनाओं के क्रियान्वयन करने में परेशानी हो रही है. हालांकि इसकी अतिरिक्त जिम्म्ेदारी नालंदा के सिविल सर्जन उठा रहे हैं. कार्यों का निष्पादन करने में लगे हैं. लेकिन पूर्णकालिक एसीएमओ की पदस्थापना नहीं होने से योजनाओं की जितनी गति मिलनी चाहिए उतनी चाहकर भी नहीं मिल पा रही है.
मालूम हो कि एसीएमओ कई प्रोग्राम के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी भी होते हैं. जैसे मलेरिया, फाइलेरिया,जिला लेप्रोसी निवारण विभाग, जिला यक्ष्मा विभाग आदि शामिल है. एसीएमओ के पास मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, रोग नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना,राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम व राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम सहित कई अन्य कार्यक्रमों के नियंत्रण पदाधिकारी की जिम्मेदारी होती है.
डीएलओ संभाल रहे डीएमओ की कमान : नालंदा जिले में जिला मलेरिया (डीएमओ) का पद की कमान इन दिनों जिला लेप्रोसी निवारण पदाधिकारी (डीएलओ) संभाल रहे हैं. जिला मलेरिया का पद पिछले करीब छह माह से रिक्त है. यानि की इस पद पर पूर्णकालिक अधिकारी पदस्थापित नहीं है. इसी तरह जिला फाइलेरिया का पद खाली है.
डीएलओ के पास डीटीओ यानि की जिला यक्ष्मा पदाधिकारी की जिम्मेवारी है. डीएलओ सह डीटीओ के पास पहले से ही महत्वपूर्ण पद की कमान है. और तो और िपछले छह माह से अधिक समय से डीएमओ की अतिरिक्त कमान संभाले हैं.अतिरिक्त जिम्मेदारी से काम के बोझ तले दबे हुए हैं.
कभी डीएमओ तो कभी डीएलओ कार्यालय का चक्कर एक ही अधिकारी को लगाना पड़ रहा है.इस तरह अधिकारी को मूल्य पद के अलावा अतिरिक्त विभाग की उपलब्धि को बेहतरी करने के लिए जी तोड़ मेहनत करनी पड़ रही है. अतिरिक्त विभागों के कार्यों के निष्पादन में तेजी लाने के लिए दोहरी मेहनत करनी पड़ रही है.
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