मिसाल : देहदान कर अमर हुए नालंदा के बंगाली प्रसाद

पटना/बिहारशरीफ : कुछ लोग जीते जी तो समाज को दिशा देने का काम करते ही हैं, मरने के बाद भी अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं. ऐसा ही कुछ कर दिखाया समाजसेवी बंगाली प्रसाद सिंह ने. अपने जवानी के शुरुआती दिनों में समाजसेवा का काम करने वाले पैठना गांव के स्व बंगाली प्रसाद सिंह आंख […]
पटना/बिहारशरीफ : कुछ लोग जीते जी तो समाज को दिशा देने का काम करते ही हैं, मरने के बाद भी अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं. ऐसा ही कुछ कर दिखाया समाजसेवी बंगाली प्रसाद सिंह ने. अपने जवानी के शुरुआती दिनों में समाजसेवा का काम करने वाले पैठना गांव के स्व बंगाली प्रसाद सिंह आंख और देह दान करने के बाद मर कर भी अमर हो गये.
पटना के आईजीआईएमएस में दान की गयी उनकी आंखों से दो नेत्रहीन दुनिया को देख सकेंगे वहीं शरीर नालंदा के पावापुरी मेडिकल छात्रों के लिए परीक्षण में काम आयेगा. नालंदा जिले के वेना थाना अंतर्गत पैठना गांव निवासी बंगाली प्रसाद सिंह (92) मुख्यमंत्री के सहयोगी व नालंदा के रहने वाले बंगाली प्रसाद सिंह मरने से पहले अपने परिवार के समक्ष मरणोपरांत नेत्रदान की इच्छा जताते हुए फार्म भरा था. 92 वर्ष की उम्र पूरी कर सोमवार को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया.
उनके बेटे व परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी मरणोपरांत नेत्रदान की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए नालंदा डीएम से संपर्क किया, इसके बाद आईजीआईएमएस के आई बैंक व क्षेत्रीय चक्षु संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ विभूति प्रसाद सिन्हा की टीम पटना से गयी और नालंदा पहुंचकर उनकी आंखें ली.
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