तीन ओपीडी में से दो में नहीं हो रहा रोगियों का इलाज

Updated at : 09 Nov 2017 7:34 AM (IST)
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तीन ओपीडी में से दो में नहीं हो रहा रोगियों का इलाज

जिला आयुर्वेद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था की खुल रही पोल महेंद्र पांडेय बिहारशरीफ : आयुष तरीके से रोगियों की पुरानी से पुरानी बीमारियों की चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए जिले में तो सरकार की ओर से दशकों से व्यवस्था है. मरीज को इसकी सहज रूप से चिकित्सा सेवा मिले इसके लिए जिला मुख्यालय अवस्थित […]

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जिला आयुर्वेद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था की खुल रही पोल
महेंद्र पांडेय
बिहारशरीफ : आयुष तरीके से रोगियों की पुरानी से पुरानी बीमारियों की चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए जिले में तो सरकार की ओर से दशकों से व्यवस्था है. मरीज को इसकी सहज रूप से चिकित्सा सेवा मिले इसके लिए जिला मुख्यालय अवस्थित जिला देसी संयुक्त औषधालय संचालित है.
पर विडंबना यह है कि मर्ज का सही रूप से इलाज हो तो कैसे, इस संस्थान को फिलहाल खुद इलाज की जरूरत है. एेसी हालत में यह संस्थान मरीजों के मर्ज को चाहकर भी ठीक कर पाने में सफल होते नहीं दिख रहा है. लिहाजा आयुर्वेद चिकित्सा से सेहत संवारने वालों रोगियों में निराशा है.
तीन में से दो ओपीडी डॉक्टर विहीन
जिला मुख्यालय अवस्थित जिला देसी चिकित्सालय में मरीजों को इलाज कराने के लिए सरकार की ओर से तीन ओपीडी की व्यवस्था की गयी है. जिसमें यूनानी, होम्योपैथ व आयुर्वेद पद्धति के ओपीडी शामिल है. इन तीन ओपीडी में से दो ओपीडी इन दिनों खुद ही बीमार पड़ा है.
एक तरह से बीमार ओपीडी में यूनानी व होमियोपैथ शामिल है. बीमार होने का ताल्लुक इस बात से है कि यूनानी व होमियोपैथ ओपीडी में संबंधित पद्धति के चिकित्सा पदाधिकारी फिलहाल पदस्थापित नहीं है. लिहाजा इन ओपीडी में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को हरदिन मायूस ही हाथ लगती है. डॉक्टर की पदस्थापना नहीं रहने से मर्ज का इलाज नहीं कर पाते हैं. बताया जाता है कि आज भी लोग आयुष पद्धति से गंभीर रोगों का इलाज सहज रूप से समझते हैं. लोगों का मानना है कि आयुष पद्धति से कई जटिल रोगों का सटिक और सरल तौर पर इलाज संभव है.
होमियोपैथ ओपीडी ढाई साल से डॉक्टर विहीन :जिला देसी चिकित्सालय के होमियोपैथ ओपीडी करीब ढाई साल से चिकित्सक विहीन पड़ा है. हालांकि इस ओपीडी में इलाज को हरदिन तीस-से चालीस मरीज इलाज को पहुंचते हैं.
इस ओपीडी में पदस्थापित डॉक्टर करीब ढाई साल पहले सेवानिवृत हो गये थे. लेकिन अब तक इस ओपीडी में सरकार की ओर से डॉक्टर की पदस्थापना नहीं की गयी है. लिहाजा रोगियों को इलाज कराने में परेशानी उठानी पड़ रही है. इसी तरह यूनानी ओपीडी में पदस्थापित डॉक्टर का एक माह पहले यहां से पटना तबादला हो गया है. पर उनकी जगह किसी डॉक्टर की पोस्टिंग नहीं हो सकी है. इस ओपीडी में भी हरदिन 30-35 मरीज बीमारी के इलाज को आते हैं. िर्फ आयुर्वेद ओपीडी में हो रहा इलाजइस आयुष औषधालय के तीन में से सिर्फ आयुर्वेद ओपीडी ही संचालित हो पा रहा है. इस ओपीडी में फिलहाल रोगियों का इलाज हो जा रहा है. इस ओपीडी में एक डॉक्टर कार्यरत है.
लेकिन इस ओपीडी में रोगियों का इलाज तो किसी तरह से हो जाता है. लेकिन रोगियों को आवश्यकता अनुसार दवा नहीं मिल पाती है.दवा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवा रोगियों को उपलब्ध नहीं हो पाती है. लिहाजा रोगियों को दवा बाहर से खरीदनी पड़ती है.यह ओपीडी हर दिन सुबह नौ बजे से साढ़े बारह बजे तक संचालित हो रहा है.
जो लोग आयुष पद्धति से बीमारी का इलाज कराने चाहते हैं,वैसे लोग लाचार व विवश होकर निजी आयुष चिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं.सरकारी औषधालय में डॉक्टर नहीं होने से निजी औषधालयों में मरीजों को अधिक खर्च उठानी पड़ रही है. इससे गरीब-गुरबे रोगियों को खासे फजीहत झेलनी पड़ रही है.चाहकर भी निजी आयुष के पास जाकर इलाज कराने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं.एक तो निजी आयुष को फी व दूसरी दुकानों से दवा खरीद पाने में गरीब मरीज सक्षम नहीं होते.इस अस्पताल के यूनानी व होमियोपैथ ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे कई मरीजों ने सरकार से अविलंब डॉक्टर की पदस्थापना की मांग की है.
होमियोपैथ ओपीडी में करीब तीन साल से डॉक्टर नहीं :जिला देसी औषधालय के होमियोपैथ ओपीडी में तकरीबन तीन साल डॉक्टर नहीं है. डॉक्टर का पद खाली पड़ रहा है.
इस ओपीडी में इलाज कराने हर दिन करीब तीन से चार दर्जन रोगी जरूर पहुंचते हैं. लेकिन उनकी बीमारी की चिकित्सा चिकित्सक के नहीं होने से नहीं हो पा रही है. लिहाजा मरीज निराश होकर बिना इलाज कराये घर लौट जाने को विवश हो रहे हैं. इस ओपीडी में पदस्थापित डॉक्टर के रिटायर होने के बाद से अब तक सरकार की ओर से होमियो चिकित्सक की पदस्थापना नहीं की जा सकी है. लिहाजा रोगियों को हर दिन फजीहत झेलनी पड़ रही है.
इसी तरह यूनानी ओपीडी में पिछले जुलाई माह से डॉक्टर का पद खाली पड़ा हुआ है. यहां पदस्थापित चिकित्सक का पटना तबादला हो जाने के बाद उनकी जगह किसी यूनानी चिकित्सक की पदस्थापना आज तक नहीं हो पाया है. इस ओपीडी में भी हर दिन दर्जनभर रोगी इलाज को आते हैं, लेकिन उन्हें भी निराशा हाथ लग रही है.
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