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सेंट्रल बोर्ड या विवि के गठन पर संस्कृति मंत्रालय में मंथन

11 Sep, 2017 9:59 am
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सेंट्रल बोर्ड या विवि के गठन पर संस्कृति मंत्रालय में मंथन

नालंदा : नव नालंदा महाविहार समेत देश के चार बौद्ध अध्ययन संस्थान के डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा समाप्त हो सकता है. संस्कृति मंत्रालय अपने अधीन के बौद्ध विद्या के शिक्षण संस्थानों के बेहतर प्रबंधन व नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय संस्थान, बोर्ड या सेंट्रल बुद्धिष्ट यूनिवर्सिटी बनाने पर विचार कर रही है. इस आशय का सुझाव […]

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नालंदा : नव नालंदा महाविहार समेत देश के चार बौद्ध अध्ययन संस्थान के डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा समाप्त हो सकता है. संस्कृति मंत्रालय अपने अधीन के बौद्ध विद्या के शिक्षण संस्थानों के बेहतर प्रबंधन व नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय संस्थान, बोर्ड या सेंट्रल बुद्धिष्ट यूनिवर्सिटी बनाने पर विचार कर रही है.
इस आशय का सुझाव राष्ट्रीय नीति आयोग ने संस्कृति मंत्रालय को दिया है. इन संस्थानों में हो रही फिजूलखर्चीं में कमी, बेहतर प्रबंधन और शैक्षणिक व्यवस्था में गुणवत्तापूर्ण सुधार की उम्मीद को लेकर यह विचार किया जा रहा है. संस्कृति मंत्रालय के अधीन देश में चार उच्च कोटि (अंतर्राष्ट्रीय स्तर) के बुद्धिष्ट स्टडी के शिक्षण संस्थान हैं.
इन संस्थानों में एशिया महादेश समेत दुनिया के कई देशों के ज्ञान पिपाशु अध्ययन व शोध के लिए आते हैं. इनमें पहला नव नालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय, नालंदा (बिहार), दूसरा सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ हायर तिब्बतीयन स्टडीज, सारनाथ (उत्तर प्रदेश), तीसरा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज लेह (जम्मू – कश्मीर) और चौथा केंद्रीय हिमालयन संस्कृति शिक्षण संस्थान दाहून्ग (हिमाचल प्रदेश) है. नीति आयोग के सुझाव पर संस्कृति मंत्रालय में गहन मंथन किया जा रहा है.
सरकार इन बौद्ध शिक्षण संस्थानों की स्वायत्ता को कम कर अपने अधीन करने की योजना बना रही है. ऐसा हुआ तो इन संस्थानों को मिली डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा समाप्त हो सकता है. इससे अलग- अलग कुलपति पर हो रहे व्यय की भी बचत होगी. सेंट्रल बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी या राष्ट्रीय स्तर का बोर्ड, संस्थान गठित करने पर विचार इसलिए भी किया जा रहा है. ये सभी शिक्षण संस्थान केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित हो रहे हैं. इनमें नालंदा समेत सभी संस्थानों को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है. ये सभी एक प्रकृति के बौद्ध विद्या केंद्र हैं.
केंद्र सरकार इन अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों के गुणवत्ता में उच्च कोटि के सुधार लाने या इन शिक्षण संस्थानों को पूर्ववत स्वरूप में रखते हुए संस्कृति मंत्रालय इनकी स्वायत्तता को कम करके अपने नियंत्रण में रखने की योजना पर विचार कर रही है. नव नालंदा महाविहार की स्थापना प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की स्मृति में किया गया है.
भारतीय गणतंत्र के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और बौद्ध भिक्षु डॉ जगदीश कश्यप के सद्प्रयास से इसकी स्थापना की गयी थी. इस महाविहार का इतिहास उतना ही पुराना है, जितना भारतीय गणतंत्र का. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की गौरवगाथा को पुनर्जीवित करने के लिए ही इस संस्थान की नीव 1951 में रखी थी. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के इतिहास को पुनर्जीवित करने के लिए राजगीर के पास नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है.
यह दोनों शिक्षण संस्थान नालंदा विश्वविद्यालय के गौरव गरिमा को पुनर्जीवित करने के लिए सचेष्ट है. आने वाला समय बतायेगा कि अपने लक्ष्य की प्राप्ति में पहले कौन सफल होता है. यूनिवर्सिटी ऑफ नालंदा विस्तृत अर्थ में लेते हुए अपने को शिक्षा का सर्वश्रेष्ठ संस्थान साबित करने के लिए प्रयासरत है. वहीं नव नालंदा महाविहार बौद्ध धर्म के विशेष परिप्रेक्ष्य में अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है.
स्वतंत्र भारत में बौद्ध विद्या को पुनर्जीवित करने के लिए देश के चार बौद्ध विद्वानों ने बीड़ा उठाया था. इनमें भिक्षु डॉ जगदीश कश्यप, आनंद कौशल्यायन भिक्षु भदंत और पंडित राहुल सांकृत्यायन का नाम शुमार है. भिक्षु डॉ जगदीश कश्यप ने नालंदा की शैक्षणिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पास ही इंद्र सरोवर के तट पर स्थल चयन किया.
इस संस्थान के पास अपना कई विशाल भवन हैं. सूत्रों की माने तो देश में कुल 131 डीम्ड यूनिवर्सिटी हैं. इन सबों में नव नालंदा महाविहार सर्वाधिक पुराना है. महाविहार ही एकमात्र सरकारी संस्थान है, जिसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल है.
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