जंक्शन पर लीची लाेड करने के लिए जगह की तलाश, 10 हजार क्विंटल का लक्ष्य

Author Lalitansoo
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जंक्शन पर लीची लाेड करने के लिए जगह की तलाश, 10 हजार क्विंटल का लक्ष्य

जंक्शन पर लीची लाेड करने के लिए जगह की तलाश, 10 हजार क्विंटल का लक्ष्य

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—- पिछले वर्ष भी व्यापारियों को हुई थी परेशानी, पुरानी लदान की जगह निर्माण के कारण टूटा, फिर नये जगह की तलाश

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

लीची का मौसम शुरू होने वाला है. इसको ध्यान में रखते हुए स्थानीय व्यापारियों और किसानों को अपनी उपज को दूसरे राज्यों तक भेजने में सुविधा हो, इसके लिए जंक्शन पर लीची के लदान के लिए उपयुक्त जगह की तलाश की जा रही है. जंक्शन पर चौतरफा पुनर्विकास के तहत निर्माण कार्य चल रहा है. पिछले वर्ष स्टेशन रोड की ओर से जिस जगह से लदान हुई थी, उस जगह को भी निर्माण कार्य को लेकर तोड़-फोड़ किया गया. सीजन में लीची लोड होने के समय एक साथ 30 से 35 ऑटो से लेकर पिकअप वैन खड़ी रहती है. ऐसे में इतने गाड़ी के पार्किंग को ध्यान में रख कर जगह को लेकर माथापच्ची चल रही है. बता दें कि 15 मई से लीची की खेप पहुंचने लगेगी.

सदर अस्पताल मोड़ के पास इंजीनियरिंग सेक्शन परिसर पर मंथन

जंक्शन पर एक ऐसी जगह चिन्हित की जा सके जहां से लीची की खेप को आसानी से ट्रेनों में लोड किया जा सके. ऐसे में धर्मशाला चौक से स्टेशन की ओर से सदर अस्पताल मोड़ के निकट रेलवे के नये इंजीनियरिंग विभाग के भवन का निर्माण कार्य पूरा हुआ है. यहां परिसर भी है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस जगह को भी प्राथमिकता में रखा गया है. पिछले वर्ष भी जगह कम होने से व्यापारियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा था.

इस बार 3.5 हजार क्विंटल अधिक लक्ष्य

पिछले वर्ष मुजफ्फरपुर स्टेशन से 6.5 हजार क्विंटल लीची का लदान किया गया था. इस वर्ष इस आंकड़े को बढ़ाकर 10 हजार क्विंटल तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिसमें जगह सबसे महत्वपूर्ण है. लीची उत्पादक किसानों और व्यापारियों का कहना है कि यदि जंक्शन पर लीची के लदान के लिए एक निश्चित स्थान उपलब्ध हो जाए, तो इससे परिवहन की प्रक्रिया सुगम और तेज हो जाएगी. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि लीची की गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिल सकेगा. दूसरी ओर रेलवे की ओर से उत्पादकों की सुविधा के लिए डेडीकेटेड पार्सल ऑफिस की स्थापना, अस्थायी शेड का निर्माण के साथ पवन एक्सप्रेस के अलावा एक स्पेशल ट्रेन चलाने पर विचार किया जा रहा है.

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ललितांशु

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ललितांशु, पत्रकारिता के क्षेत्र में बीते 16 वर्षों से सक्रिय ललितांशु के लिए 'पॉजिटिव खबरों' को चुनना और उन्हें समाज के सामने लाना प्राथमिकता और जुनून रहा है. रेल और सोशल मीडिया से जुड़ी खबरों से इनका अधिक जुड़ाव है.

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