यशी सिंह की बरामदगी सीबीआइ के लिए होगी चुनौती, दो साल में खुशी का नहीं लगा सकी सुराग
Updated at : 22 Sep 2024 1:07 AM (IST)
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यशी सिंह की बरामदगी सीबीआइ के लिए होगी चुनौती, दो साल में खुशी का नहीं लगा सकी सुराग
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मुजफ्फरपुर.
छह साल की मासूम खुशी अपहरण कांड की जांच कर रही सीबीआइ को अब एमबीए की छात्रा यशी सिंह अपहरण कांड की जांच की जिम्मेवारी मिली है. दोनों केस की गुत्थी उलझी हुई है. खुशी अपहरण कांड में ब्रह्मपुरा व यशी सिंह अपहरण केस में सदर थाने की पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है. हाइकोर्ट ने पूर्व में इस पर कड़ी टिप्पणी भी की थी. यशी व खुशी अपहृत दोनों बेटियों की मां अपनी ममता को यह भरोसा दिला रही है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआइ उनकी बेटी की सुराग तलाश रही है. जल्द ही उनके घर की खुशियां लौट आएगी. एमबीए छात्रा के केस की जांच पहले सीआइडी कर रही थी. करीब डेढ़ साल तक जांच करने के बाद भी जब सीआइडी को कुछ सुराग हासिल नहीं हुआ तब हाइकोर्ट ने इस कांड की जांच की जिम्मेदारी सीबीआइ को दे दी है. सीबीआइ के अधिकारी जल्द ही इस केस का चार्ज लेने के बाद सीबीआइ के अधिकारी छानबीन के लिए जल्द ही मुजफ्फरपुर पहुंच सकते हैं. इधर, यशी की मां रश्मि सिंह का कहना है कि पुलिस व सीआइडी ने निराश किया है. अब सीबीआइ को जांच मिली है, देखते हैं आगे क्या होता है. जानकारी हो कि शहर की चर्चित नवरूणा हत्याकांड की जांच भी सीबीआइ को दी गयी थी. लेकिन, इस केस में सीबीआइ पूरी तरह से फेल हो गयी थी. इसके बाद दूसरी गायब बेटी खुशी अपहरण कांड की जांच की जिम्मेवारी दी गयी. दो साल से अधिक बीत जाने के बाद भी उसका कुछ सुराग नहीं मिल पाया है. अब तीसरी गायब बेटी यशी सिंह की बरामदगी की जिम्मेदारी सीबीआइ को मिली है. जिलेवासियों की भी सीबीआइ से काफी उम्मीद है.कॉल डिटेल्स व सीसीटीवी फुटेज तक ही सीमित रही थी पुलिस की जांच
सदर थाना क्षेत्र के भगवानपुर से 12 दिसंबर 2022 को अपहृत एमबीए की छात्रा 22 वर्षीय यशी सिंह की का पता बताने वाले या बरामदगी में सहयोग करने वाले के लिए तीन लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की गयी थी. यशी सिंह के अपहरण के बाद सदर पुलिस ने जांच में जो लापरवाही बरती है. इसके लिए हाइकोर्ट फटकार भी लगा चुकी है. यशी के अपहरण के बाद पुलिस ने सामान्य अपहरण की बात समझ कर शुरुआत में अनुसंधान में दिलचस्पी नहीं ली. इसके बाद परिजन ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए धरना प्रदर्शन शुरू किया. शुरूआती जांच में सदर पुलिस सीसीटीवी फुटेज व कॉल डिटेल तक ही सीमित रही. इस बीच एक साल बाद 20 नवंबर को यशी सिंह के सोशल मीडिया अकाउंट एक्टिव हुआ. यशी सिंह के परिजनों के आवेदन पर इओयू के साइबर सेल ने 11 अप्रैल को जांच के बाद बता दिया कि यशी का सोशल मीडिया अकाउंट अर्चना कुमारी चला रही है. पुलिस ने इस मामले में अर्चना समेत दो को गिरफ्तार करके जेल भेजी थी. इस मामले में सोनू कुमार को भी पुलिस ने पांच दिनों तक हिरासत में लेकर पूछताछ की थी. लेकिन, पुलिस का कहना है कि उससे पूछताछ के बाद कोई सुराग नहीं मिल पाया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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