लुप्त हो रही है मुजफ्फरपुर की जीवन रेखा कदाने और जमुआरी नदी

Published by : PRASHANT KUMAR Updated At : 18 May 2025 10:16 PM

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लुप्त हो रही है मुजफ्फरपुर की जीवन रेखा कदाने और जमुआरी नदी

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किलकारी में हुआ संवाद, नदी विशेषज्ञ ओम प्रकाश भारती ने दिया व्याख्यान बिहार के नदियों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सर्वेक्षण का लिया संकल्प उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर जिला स्कूल परिसर स्थित किलकारी में रविवार को नदी मित्र के द्वारा नदी संवाद का आयोजन किया. संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत सबसे पहले बच्चों को नदी प्रदूषण व जल संरक्षण से संबंधित फिल्म दिखायी गयी. मुख्य वक्ता नदी विशेषज्ञ व महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रो ओम प्रकाश भारती ने व्याख्यान प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि बिहार में कई नदियां ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही हैं, लेकिन कुछ समय के बाद लुप्त हो गयी या उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो गयी. इन नदियों के लुप्त होने के पीछे पर्यावरणीय परिवर्तन, मानवीय हस्तक्षेप, नदियों में प्रदूषण, जलकुंभी का फैलाव और नदियों के प्राकृतिक मार्ग में बदलाव है. कदाने नदी, जो कभी मुजफ्फरपुर के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत थी, अब जलकुंभी और प्रदूषण के कारण लगभग लुप्त होने के कगार पर है. नाले का गंदा पानी इस नदी में मिल रहा है, जिससे इसका जल अशुद्ध हो गया है और इसका पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो रहा है. चार दशक पहले तक थी जमुआरी नदी, अब सूख रही डॉ ओमप्रकाश भारती ने कहा कि जमुआरी नदी जिले के सकरा के जहांगीरपुर से निकल कर समस्तीपुर के पूसा, ताजपुर, मोरवा व सरायरंजन से होकर गुजरती है. उत्तर दिशा में सकरा के जहांगीरपुर चौर स्थित बूढ़ी गंडक से निकलकर यह नदी दक्षिण दिशा में सरायरंजन के अरमौली गांव स्थित नून व बलान नदी में मिलती है. इस नदी की लंबाई करीब साठ किलोमीटर तथा चौड़ाई करीब डेढ़ सौ मीटर थी. इसके बहाव से पूरे क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई होती थी. चार दशक पूर्व इस नदी में पानी का बहाव दिखता था, पर धीरे-धीरे मिट्टी तथा गाद के भर जाने से यह नदी उथरी होती गयी. बूढ़ी गंडक से जल प्रवाह के रुक जाने से यह नदी पूरी तरह बरसाती नदी बन कर रह गयी. इस मौके पर नदी मित्र द्वारा बिहार की नदियों के सांस्कृतिक मान चित्रण का संकल्प लिया गया. इसमें नदियों की जनगणना के साथ नदियों से जुड़े मिथक, कहानी, गीत व ऐतिहासिक विवरणों को एकत्र किया जायेगा. साथ ही नदियों किनारे बसे समुदायों, तीर्थस्थलों, सांस्कृतिक स्थल, पर्व, त्यौहार व अनुष्ठानों का अध्ययन किया जायेगा. संचालन रंगकर्मी सुनील फेकनिया, धन्यवाद ज्ञापन किलकारी के नाट्य प्रशिक्षक राजू सहनी व स्वागत किलकारी संयोजक पूनम कुमारी ने किया.

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