उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुरबिहार की जीविका परियोजना ने एक बार फिर अपनी सफलता का परचम लहराया है. शराबबंदी के बाद शुरू की गई ””””सतत जीविकोपार्जन योजना”””” अब बिहार के साथ-साथ महाराष्ट्र, असम, तेलंगाना और झारखंड में भी लागू होगी. इन राज्यों के प्रतिनिधियों ने मुजफ्फरपुर आकर योजना का अध्ययन किया और इसकी सफलता की कहानी को करीब से जाना.
महिलाओं की सफलता की कहानीगुरुवार को आयोजित एक वेबिनार में मुजफ्फरपुर जिले की संगम सीएलएफ की उपाध्यक्ष आशा दीदी ने 2018 से संचालित इस योजना के बारे में अपने अनुभव साझा किये. उन्होंने बताया कि किस प्रकार इस योजना ने गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है. वेबिनार में दीनदयाल ग्रामीण आजीविका मिशन और ब्रॉक संस्था सहित पांच राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए.अन्य राज्यों ने भी माना लोहा :
दूसरे राज्यों से आये प्रतिनिधियों ने यह जानने का प्रयास किया कि शराबबंदी के बाद इस योजना के तहत अत्यंत गरीब परिवारों को जीविका के सहयोग से किस प्रकार आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है. उन्होंने देखा कि किस प्रकार महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर लखपति बनने तक का सफर तय कर रही हैं.मुजफ्फरपुर बना मॉडल :
डीपीएम अनीशा ने कहा कि मुजफ्फरपुर की महिलाएं सशक्त हैं और उनकी सफलता की कहानी पूरे देश में गूंज रही है. यही कारण है कि कई योजनाओं को लागू करने के लिए मुजफ्फरपुर को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना जाता है.योजना का उद्देश्य : इस योजना का मुख्य उद्देश्य शराब के उत्पादन और बिक्री में लगे गरीब परिवारों को वैकल्पिक रोजगार प्रदान करना है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें.
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