ePaper

नहीं रहे साहित्यसेवी शिरोमणि डॉ रामेश्वर

Updated at : 09 May 2025 9:57 PM (IST)
विज्ञापन
नहीं रहे साहित्यसेवी शिरोमणि डॉ रामेश्वर

नहीं रहे साहित्यसेवी शिरोमणि डॉ रामेश्वर

विज्ञापन

दीपक – 12 मुजफ्फरपुर. वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामेश्वर प्रसाद का गुरुवार की देर रात रामबाग स्थित उनके आवास पर निधन हो गया. उनकी उम्र 86 वर्ष की थी. वे अविवाहित रहे और बड़े भाई के पुत्र के साथ जीवन व्यतीत किया. मुखाग्नि पुत्रवत गोपाल ने दी. इनके निधन से शहर के साहित्यकारों ने शोक जताया है. इनकी प्रसिद्ध पुस्तक बज्जिका की रचनाएं, कुंती का बेटा, हम कहां हती, दरकइत दर्पण, हे मां, मातृभूमि और भारत मां सहित हिंदी में उनका काव्य संग्रह ऐ लाश सुनो, विपिन में मधुशाला, आम्रपालिक विजय और त्रिफुल नाटक थी. डॉ. रामेश्वर प्रसाद 20 वर्षों तक स्कूल में शिक्षक रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Vinay Kumar

लेखक के बारे में

By Vinay Kumar

I am working as a deputy chief reporter at Prabhat Khabar muzaffarpur. My writing focuses on political, social, and current topics.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन