Litchi Juice: दिल्ली हाट के बिहार उत्सव में लीची जूस बनी लोगों की पहली पसंद

Updated at : 02 Apr 2025 7:27 AM (IST)
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लीची का जूस

लीची का जूस

Litchi Juice: मुजफ्फरपुर की लीची जूस लोगों की काफी पसंद आ रही है. यह नजारा दिल्ली हाट के बिहार उत्सव में देखने को मिली, जहां पर लीची जूस के काउंटर पर लोगों की लंबी लाइनें लग रही थी. इसके साथ ही बिहार उत्सव में घूमने वाले लोग तारीफ करने के साथ लीची के प्रोडक्शन और अन्य प्रोडक्ट के बारे में भी जानकारी ली.

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ललितांशु/ मुजफ्फरपुर. सीजन आने से पहले ही दिल्ली हाट में लगे बिहार उत्सव में (Litchi Juice) लीची की मिठास चारों ओर फैल गयी है. बिहार की समृद्ध कलाओं की खरीदारी के बाद मुजफ्फरपुर के लीची जूस को पीने के लिए काफी भीड़ उमड़ी. यह जूस, उत्सव में घूमने के बाद थक जाने पर लोगों को तरोताजा करने के साथ काफी पसंद आयी. बीते 31 मार्च को उत्सव संपन्न हो गयी. जिसमें काउंटर पर 50 रुपये प्रति ग्लास लीची का जूस की जम कर बिक्री हुई. इसके साथ ही पैक बोतल में भी लोग खरीद कर जूस को घर ले गए. मॉनिटरिंग टीम के एक अधिकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर के लीची जूस काउंटर पर खूब भीड़ रही. बिहार उत्सव में घूमने वाले लोग तारीफ करने के साथ लीची के प्रोडक्शन और अन्य प्रोडक्ट के बारे में भी जानकारी ली. खास कर दिल्ली में उत्तर बिहार और मुजफ्फरपुर के रहने वाले लोग खोज कर काउंटर पर पहुंचे.

बिहार उत्सव में क्या रहा खास

बिहार के पारंपरिक हस्तशिल्प और व्यंजनों का विशेष आयोजन किया गया. विभिन्न स्टॉलों पर पटना की पटवाइया, भागलपुरी सिल्क, और मधुबनी पेंटिंग्स ने सभी का ध्यान खींचा. वहीं, लिट्टी-चोखा, सत्तू और मखाना जैसे बिहार के पारंपरिक व्यंजन भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे. दिल्ली हाट, आइएनए में बिहार दिवस 2025 का भव्य शुभारंभ हाल में हुआ. दिल्ली हाट में लगा बिहार उत्सव 31 मार्च तक चला. वहीं बिहार उत्सव घूमने के लिए कोई टिकट नहीं खरीदनी पड़ी, लोगों को मुफ्त में एंट्री मिली.

कलाकृति बिहार के शिल्प और सांस्कृतिक धरोहर की कहानी

दिल्ली में मुजफ्फरपुर की रहने वाली वीणा कुमारी, काजल कुमारी, बबिता, ने बताया बिहार उत्सव में अद्भुत सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्वादिष्ट व्यंजनों की झलक देखने को मिली. यहां प्रदर्शित प्रत्येक कलाकृति बिहार के शिल्प और सांस्कृतिक धरोहर की कहानी कहती है. वहीं दीप, कुणाल ने बताया कि बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों से आए कलाकार ने अपनी कला का प्रदर्शन किया. लोक संगीत और नृत्य ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया. इसके साथ ही मधुबनी पेंटिंग, भागलपुर के सिल्क के काउंटर, सिकी कला, टेराकोटा शिल्प, सुजनी कढ़ाई व बिहार के अन्य हस्त निर्मित उत्पाद लोगों को खूब पसंद किया.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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