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बिना नामांकन सीधे डिग्री प्राप्त करने व टीआर में टेंपरिंग की जांच शुरू

Updated at : 11 Dec 2024 8:10 PM (IST)
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बिना नामांकन सीधे डिग्री प्राप्त करने व टीआर में टेंपरिंग की जांच शुरू

दो महीने पहले टीआर में टेंपरिंग कर पांच स्टूडेंट्स का नाम सीधे टीआर पर दर्ज करने के मामले की जांच शुरू की गयी है.

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-विवि ने गठित की तीन सदस्यीय कमेटी-बीएड कॉलेज के नाम पर जारी है डिग्री

मुजफ्फरपुर.

बीआरएबीयू में करीब दो महीने पहले टीआर में टेंपरिंग कर पांच स्टूडेंट्स का नाम सीधे टीआर पर दर्ज करने के मामले की जांच शुरू की गयी है.अक्तूबर में यह मामला विवि के संज्ञान में आया था. तीन सदस्यीय कमेटी में कुलानुशासक प्रो बीएस राय, डीएसडब्ल्यू डॉ आलोक प्रताप सिंह व साइंस संकाय के डीन प्रो शिवानंद सिंह को शामिल किया गया है.

बताया गया कि कमेटी को कहा गया है कि शीघ्र मामले की जांच कर रिपोर्ट दें. जांच के बाद जो भी कर्मचारी से लेकर अधिकारी दोषी मिलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. बता दें कि एक बीएड काॅलेज के नाम पर 2013 सत्र में बीएड कोर्स में पासआउट होने का विवरण देते हुए पांच अभ्यर्थियों ने विवि के पोर्टल पर डिग्री व प्रोविजनल के लिए आवेदन दिया था. इसमें से दो छात्रों को डिग्री और एक काे प्रोविजनल जारी किया जा चुका है. एक और डिग्री के लिए जब अभ्यर्थी के आवेदन का टीआर से सत्यापन किया जा रहा था तो कर्मचारी को टीआर पर दर्ज नाम में संदेह हुआ. अलग से ही दिख रहा था कि इनका नाम अलग से टीआर पर प्रिंट किया गया है. जब विश्वविद्यालय ने कॉलेज से सत्यापन कराया तो कॉलेज ने बताया कि संबंधित सत्र में उन पांचों में से किसी का नामांकन वहां नहीं हुआ है. न तो उन छात्रों से जुड़ा कोई रिकाॅर्ड कॉलेज में है. ऐसे में उन पांच स्टूडेंट्स का नाम विश्वविद्यालय के टीआर में किसने जोड़ा, यह सवाल उठने लगा.

नौकरी के लिए की है डिग्री का इस्तेमाल

जिन दो अभ्यर्थियों ने विवि से डिग्री प्राप्त कर ली है, वे इन्हीं डिग्री की बदौलत शिक्षक के रूप में योगदान दे चुके हैं. अब विवि उन छात्रों की भी तलाश कर रही है. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो प्रति छात्र चार से पांच लाख रुपये लेकर छात्रों के नाम टीआर में जोड़े गये हैं. इसमें विश्वविद्यालय के कर्मियों की भी भूमिका स्पष्ट है. क्योंकि टीआर को विभाग से बाहर ले जाना, फिर वापस लाना और उसी के आधार पर अंकपत्र से लेकर दो छात्रों को डिग्री और एक को प्रोविजनल भी जारी कराना आसान नहीं है.

स्टेट्स वेबसाइट पर नहीं दिख रहा

इस पूरे प्रकरण को बेहद सफाई से अंजाम दिया गया है. डिग्री जारी करने के बाद उसका स्टेट्स विवि की वेबसाइट पर अपडेट नहीं किया गया है. डिग्री जारी होने के ठीक बाद उसका डिस्पैच डेट और डिग्री नंबर भी वेबसाइट पर प्रदर्शित होने लगता है, लेकिन जिन दो छात्रों को डिग्री मिली है उनका स्टेट्स अब भी वेबसाइट पर नहीं दिख रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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