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हंसी-मजाक में गहरे पानी में चले गए सभी दोस्त, एक-दूसरे को बचाने में नदी में डूबने लगे

Updated at : 19 Aug 2024 1:23 AM (IST)
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हंसी-मजाक में गहरे पानी में चले गए सभी दोस्त, एक-दूसरे को बचाने में नदी में डूबने लगे

हंसी-मजाक में गहरे पानी में चले गए सभी दोस्त, एक-दूसरे को बचाने में नदी में डूबने लगे

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-एसडीआरएफ की टीम अब सोमवार को डूबे युवकों की करेगी तलाश-मिल्की टोला में नहीं जला चूल्हा, परिजनों के चीत्कार से माहौल गमगीन मुजफ्फरपुर. बूढ़ी गंडक नदी में रविवार की दोपहर बहुत चहल – पहल थी. काफी संख्या में लोग नदी में स्नान कर रहे थे. इस बीच मुक्ति धाम से अंतिम संस्कार में शामिल होकर सादपुरा मिल्की टोला के दर्जनों लोग नदी में आकर स्नान करने लगे. सभी लोग नहाने के बाद नदी से निकल कर वापस अपने घर चले गए. लेकिन, छह दोस्त नदी में नहाते ही रहे. उनमें से अधिकांश नदी में तैरना नहीं जानते थे. हंसी मजाक में ही सभी दोस्त धीरे- धीरे गहरे पानी व तेज धार में चले गए. फिर, एक दूसरे को बचाने में सभी नदी में डूबने लगे. सदर अस्पताल में भर्ती प्रिंस कुमार का कहना है कि उसको दोस्त विकास कुमार गहरे पानी में ले गया था. वहीं छोड़कर वह वापस आने लगा. जब वह डूबने लगा तो दो मिनट तक पानी में ही ऊब – डूब करने लगा. इस दौरान वह पानी भी पी लिया. इस बीच नाव आयी तो उनकी जान बची. वहीं, विकास का कहना है कि वे लोग बाहर आ गए थे. चारों को डूबता देखकर वे बचाने गया तो डूबने लगे. सिकंदरपुर थानेदार रमन कुमार का कहना है कि प्रिंस कुमार , मनीष महतो, विकास कुमार व विकास राज, रोहित व बबलिस नदी में नहा रहे थे. इस दौरान हंसी – मजाक में सभी गहरे पानी में चले गए . एक दूसरे को बचाने में सभी डूबने लगे. स्थानीय नाविक की मदद से चार को बचा लिया गया. वहीं, दो दोस्त रोहित कुमार (19) और बबलिस कुमार (18) नदी में डूब गए है. देर शाम अंधेरा होने के कारण एसडीआरएफ की टीम की खोजबीन बंद हो गयी है. अब डूबे दोनों युवकों की तलाश सोमवार को की जाएगी. वार्ड 32 के पार्षद पति मनोज कुमार ने बताया कि सादपुरा मिल्की टोला में माहौल गमगीन है. पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है. – विधवा मां का इकलौता सहारा था रोहित, मां बार- बार हो रही थी बेहोश रोहित अपनी विधवा मां पुतुल देवी का इकलौता सहारा था. पिता की मौत के बाद वह ई – रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण- पोषण कर रहा था. बेटे की नदी में डूबने की खबर जैसे ही पुतुल देवी को मिली वह भागते हुए नदी किनारे पहुंची. सीढ़ी घाट पर वह बार- बार बेहोश हो रही थी. वहां मौजूद पुलिस पदाधिकारी व सीओ से बेटे को सुरक्षित नदी से बाहर निकालने की गुहार लगा रही थी. – आंचल फैला रीना देवी कह रही थी हे गंगा मइया हमर बेटा के लौटा दाबबलिस की मां रीना देवी बार- बार नदी किनारे आंचल फैलाये पहुंच जा रही थी. वह बस एक ही गुहार लगा रही थी कि हे गंगा मइया हमर बेटा के लौटा दा. बबलिस इसी साल दसवीं की परीक्षा दिया था. उसके पिता रिक्शा चलाते हैं. बेटे को पढ़ा- लिखाकर अफसर बनाने का सपना था. मां के साथ- साथ नानी व बुआ भी नदी किनारे बैठकर चीत्कार मचा रही थी. – पुलिस ने बुलाया दो गोताखोर, दो घंटे तक की खोजबीन एसडीआरएफ की टीम को को जब डूबे दोनों युवक का कुछ सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने दो गोंताखोर को भी बुलाया. दोनों ने करीब दो घंटे तक नदी में खोजबीन की. लेकिन, डूबे दोनों युवकों का कुछ पता नहीं चल पाया. अब सोमवार को खोजबीन की जाएगी. – प्रिंस के इलाज के दौरान सदर अस्पताल में हंगामा, डायल 112 को बुलाया गया प्रिंस को इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे परिजन व मोहल्ले के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया. अस्पताल प्रशासन ने विधि व्यवस्था की समस्या को देखते हुए डायल 112 की टीम को सदर अस्पताल बुलाया. इसके बाद हंगामा शांत हुआ. डॉक्टरों का कहना है कि प्रिंस की हालत खतरे से बाहर है. – मौसेरे भाई की जान बचाने में खुद डूबने लगा विकासविकास कुमार ने पुलिस को बताया कि वह नदी में स्नान करने के बाद बाहर आ रहा था . इस बीच उसका मौसेरा भाई रोहित व उसका दोस्त बबलिस नदी में डूबने लगा. उसके शोर मचाने पर वह वापस उनको बचाने के लिए बीच धारा में चला गया. वह दोनों का हाथ पकड़ लिया. इस बीच वह भी नदी में डूबने लगा. इस बीच नाव आया और वह पकड़ कर बाहर आया. – कन्हाई ने तीन नाव की जंजीर खोलकर चारों युवकों की बचायी जान सिकंदरपुर सीढ़ी घाट के रहने वाले कन्हाई कुमार की दिलेरी से चार युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. कन्हाई ने बताया कि वह जब घाट पर पहुंचा तो देखा कि छह युवक नदी में डूब रहे हैं. वह दौड़कर घाट किनारे पहुंचा तो देखा कि सभी नाव जंजीर से बांधे हुए हैं. वह एक साथ तीन नाव की जंजीर खोला और डूब रहे युवकों के पास नाव लेकर पहुंच गया. चार को तीनों नाव के सहारे सुरक्षित बाहर निकाल लिया. बाकी दो गहरे पानी में चले गए थे. इस वजह से जान नहीं बचा पाए.

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