मुजफ्फरपुर.
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो संगीत रागी ने कहा कि भारतीयों को अपराध बोध से मुक्त होकर भारत बोध की मनोवृत्ति पर ध्यान देना चाहिये. सांस्कृतिक मूल्यों द्वारा ही भारत को सफल व सार्थक राष्ट्र बना सकते हैं. भारत में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आधारशिला में वेद, वेदांग, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, विवेकानंद, अरविंद, सावरकर, टैगोर व गांधी की प्रमुख भूमिका रही है. सनातन संस्कृति के मूल्यों को हमेशा ही संरक्षित और संवर्धित इन महान विभूतियों ने किया है. प्रो रागी बीआरएबीयू के राजनीतिक विज्ञान विभाग में सेमिनार के मुख्य वक्ता थे.इसका आयोजन इंडियन काउंसिल आफ हिस्टॉरिकल रिसर्च द्वारा किया गया. यह दो दिनों तक चलेगा. उद्घाटन सत्र में बीआरएबीयू के कुलपति प्रो दिनेश चंद्र राय ने भारतीय संस्कृति को सर्वांगीण,सामूहिक व सहजीवी बताया. बतौर मुख्य अतिथि महात्मा गांधी केंद्रीय विवि, मोतिहारी के कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय संस्कृति के जड़ों को सनातन संस्कृति और शिक्षा से पोषित होना चाहिये. कार्यक्रम में संयोजक राजनीतिक विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो नीलम, प्रो मधु सिंह, समन्वयक प्रो दिलीप, डॉ कांतेश, डॉ भारती सेहता, डॉ रक्षा सिंह मौजूद रहे. मंच संचालन डॉ अमर बहादुर शुक्ल ने किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

