Bihar News: घरेलू हिंसा रोक रहीं जीविका दीदियां, तीन वर्षों में तलाक में आयी 37.5 फीसदी की गिरावट

Author Ashish jha
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Jeevika Didi

फाइल फोटो

Bihar News: जीविका से जुड़ कर महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है. घरले झगड़े सुलझाने और तलाक को रोकने में भी जीविका की अहम भूमिका हैं. घरेलू झगड़े और तलाक के अधिकतर मामले आर्थिक कमजोरी के कारण आते हैं.

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Bihar News: मुजफ्फरपुर. आर्थिक समृद्धि के साथ अब जीविका दीदियां घरेलू झगड़े सुलझा रही हैं. साथ ही तालाक की स्थिति जैसे मामलों में मध्यस्थता कर परिवारों को टूटने से बचा रही हैं. इस कार्य में स्चयं सहायता समूह की 1.2 लाख दीदियां जुटी हुई हैं. समूह के माध्यम से जैसे ही दीदियों को पता चलता है किसी घर में किसी तरह का विवाद है तो दीदियां उन घरों में पहुंचती हैं और पारिवारिक विवाद को शांत करती हैं. अगर आर्थिक कारण से विवाद है तो घर की महिला को जीविका से जोड़ कर उसके रोजगार का प्रबंध किया जाता है. उसे ऋण दिला कर किसी उद्यम से जोड़ा जाता है. महिला बाल विकास निगम की रिपोर्ट के अनुसार जीविका दीदियों की इस पहल से घरेलू झगड़े कम हुये हैं और तलाक में भी कमी आयी है.

इस वर्ष काउंसलिंग से डेढ़ हजार केस सुलझे

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में तलाक के 1200 मामले आये थे जो इस वर्ष घटकर 750 हो गया है. तलाक के मामले में 37.5 फीसदी की कमी आयी है. जीवका के इस प्रयास से परिवार बिखरने से बच रहा है. साथ ही उस परिवार की महिलाओं को आर्थिक स्वाबलंबन का रास्ता भी मिल रहा है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में 52 हजार जीविका समूह चल रहे हैं. जिनमें जिनमें 40 फीसदी समूह पारिवारिक मुद्दों पर फोकस करता है. जीविका के माध्यम से अगर कोई विवाद नहीं सुलझता तो उसे सदर अस्पताल में चल रहे वन स्टॉप सेंटर में भेजा जाता है. यहां काउंसलर पारिवारिक विवाद को समाप्त करने की कोशिश करते हैं. जीविका के प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर भी बढ़ रही है. इस वर्ष हुये काउंसलिंग से महिलाओं के डेढ़ हजार केस सुलझे हैं.

तीन हजार से अधिक बचायी हैं शादियां

आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षा में तीन हजार से अधिक महिलाओं ने आर्थिक सशक्तिकरण से शादियां बचायी है. यह लगातार जारी है. मुशहरी की किरण देवी बताती हैं कि 2019 तक कर्ज का बोझ उन्हें तोड़ रहा था. रोज पति के साथ विवाद के कारण तलाक की स्थिति बन गयी थी, लेकिन जीविका की सखी क्रांति कैंप ने उनका हाथ थामा. जीविका के सहयोग से सिलाई मशीन मिला. इसके बाद से यह सफर लगातार आगे बढ़ा. आज सिलाई केंद्र से 10 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है. डीपीएम अनीशा कहती हैं कि जीविका से जुड़ कर महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है. घरले झगड़े सुलझाने और तलाक को रोकने में भी जीविका की अहम भूमिका हैं. घरेलू झगड़े और तलाक के अधिकतर मामले आर्थिक कमजोरी के कारण आते हैं. दीदियां उस घर की महिलाओं को आर्थिक उन्नति का रास्ता दे रही हैं, जिससे घरेलू झगड़ों के मामलों में कमी आयी है.

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आशीष झा

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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