मुजफ्फरपुर में बड़ा खुलासा: बच्चों पर बेअसर हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं, SKMCH के रिसर्च में डराने वाली रिपोर्ट

Edited by SUMIT KUMAR
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अब बच्चों पर बेअसर हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं

Antibiotic Resistance in Children: मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि अत्यधिक दुरुपयोग के कारण बच्चों पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो रही हैं. डॉक्टरों को निमोनिया और डायरिया में भी महंगी और रिजर्व दवाएं लिखनी पड़ रही हैं.जानिए पूरी खबर…

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मुजफ्फरपुर से विनय कुमार की रिपोर्ट

Antibiotic Resistance in Children: एंटीबायोटिक दवाओं (Antibiotics) के अत्यधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल का सबसे खतरनाक असर अब मासूम बच्चों पर दिखने लगा है.(SKMCH) एसकेएमसीएच के शिशु रोग और माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में चिंताजनक खुलासा हुआ है.रिसर्च के मुताबिक अस्पतालों में इलाज के लिए आ रहे कई बच्चों में सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर साबित हो रही हैंं. ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों में एंटीबायोटिक रेसिस्ट की संख्या अधिक है. इस कारण अब निमोनिया, डायरिया और बैक्टीरियल बुखार जैसी सामान्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों को ठीक करने के लिए भी डॉक्टरों को रिजर्व कैटेगरी की शक्तिशाली और महंगी एंटीबायोटिक दवाएं लिखनी पड़ रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक का सेवन इसी तरह से होता रहा हो तो एक समय ऐसा भी आएगा जब एंटीबायोटिक दवाएं बीमारी दूर करने में कारगर नहीं होंगी.

बेअसर हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं

बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक लेना खतरनाक

एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ गोपाल शंकर सहनी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के रेसिस्ट होने की संख्या अधिक हो रही है. इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों के झोला छाप डाॅक्टर सामान्य सर्दी-बुखार में भी एंटीबायोटिक दवाएं दे रहे हैं. इसके अलावा कुछ लोग दवा दुकानदार से पूछकर बच्चों को एंटीबायोटिक दवाएं दे रहे हैं. कई बार डॉक्टर को दिए गए कोर्स को पूरा नहीं करके दो-तीन दवा खाने के बाद आराम होने पर दवा छोड़ देते हैं. इस कारण एंटीबायोटिक दवाएं रेसिस्ट कर जाता है ओर बैक्टीरिया को मारने की क्षमता कम हो जाती है.

होमी भाभा कैंसर अस्पताल कर रहा सर्वे

रेसिस्ट हो रहे एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को रोकने के लिए होमी भाभा कैंसर अस्पताल, एसकेएमसीएच, पीएमसीएच, डीएमसीएच और एनएमसीएच एक साथ अभियान चलायेगा. इसकी शुरुआत एसकेएमसीएच, इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रो बायोलॉजिस्ट बिहार चैप्टर व होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र ने की है. फिलहाल होमी भाभा कैंसर अस्पताल के रिसर्चर विवेकानंद गोई मरीजों के पुर्जे पर लिखी दवा और किस मर्ज के लिए उसका इस्तेमाल किया जा रहा है. इस पर सर्वे कर रहे हैं. इसके अलावा जीनोम सिक्वेंसी के आधार पर भी मरीजों के अंदर कौन-सी दवा रेसिस्ट कर रही है और किस दवा का प्रभाव कितना होगा, इस पर रिसर्च किया जा रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जारी की सख्त गाइडलाइन

विश्व स्वास्थ्स संगठन ने जारी किया निर्देश विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और बैक्टीरिया में बढ़ते रेजिस्टेंस को देखते हुए डॉक्टरों के लिए दिशा निर्देश जारी किया है. जिसमें कहा गया है कि सामान्य और कम गंभीर संक्रमणों में त्वचा के सामान्य रोग या यूरिन इंफेक्शन के इलाज के लिए डॉक्टरों को सबसे पहुंच श्रेणी की दवा लिखनी चाहिए. इसके बाद निगरानी समूह यानी उच्च क्षमता वाले एंटीबायोटिक्स दवाएं और अंत में रिजर्व श्रेणी की दवाएं लिखनी चाहिए.

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SUMIT KUMAR

लेखक के बारे में

By SUMIT KUMAR

सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

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