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एइएस से कैसे होगा बचाव, जब तीन हजार 287 बच्चे कुपोषित

Updated at : 24 Mar 2025 1:07 AM (IST)
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एइएस से कैसे होगा बचाव, जब तीन हजार 287 बच्चे कुपोषित

एइएस से कैसे होगा बचाव, जब तीन हजार 287 बच्चे कुपोषित

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-जीविका के सर्वे से मिली जानकारी, एइएस का बढ़ा खतरा-जीविका के 52 हजार समूहों ने घर-घर किया था सर्वे

मुजफ्फरपुर.

स्वास्थ्य विभाग एइएस से बचाव की तैयारी में जुटा हुआ है. प्रखंड से जिला स्तर तक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि हालात यह है कि जिले में तीन हजार 287 बच्चे कुपोषित हैं, जिनकी देखभाल नहीं हो रही है. इन बच्चों को पोषित किये बिना एइएस से बचाव का इंतजाम नहीं किया जा सकता. यह आंकड़ा पिछले दिनों जीविका की ओर से जिले में किये गये सर्वे से आया है. जीविका के 52 हजार समूहों ने घर-घर जाकर पोषण के मानक के अनुसार ऐसे बच्चों की पहचान की है. अब तक के रिसर्च से यह बात सामने आयी है कि एइएस बीमारी का खतरा वैसे ही बच्चों को अधिक रहता है, जो कुपोषित हैं. स्वास्थ्य विभाग बचाव की तैयारी भले कर रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे बच्चों को पोषित किये बिना एइएस से बचाव संभव नहीं है. जीविका के सर्वे से पता चला है कि जिले में छह से 25 माह के 30 हजार 839 बच्चे हैं, जिसमें 27 हजार 552 बच्चे स्वस्थ हैं, लेकिन तीन हजार 287 बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है.

21 हजार 273 महिला गर्भवती, 2739 कुपोषण के शिकार

सर्वे से यह पता चला है कि जिले में 21 हजार 273 महिला गर्भवती हैं, जिनमें 2739 कुपोषण के शिकार हैं. इनमें कुछ एनीमिया की शिकार हैं तो कुछ को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है. जिले में 17 हजार 952 ऐसी महिलाएं हैं, जिनके छह माह तक के बच्चे हैं, लेकिन इनमें भी 1863 महिलाएं कुपोषण के शिकार हैं. इन महिलाओं को भी पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है. स्त्री रोग विशेषज्ञों की माने तो गर्भवतियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से गर्भ में शिशुओं का भी पोषण ठीक तरह से नहीं हो पाता है. प्रसव के बाद इन शिशुओं का जीवन खतरे में रहता है. वहीं प्रसव के समय जच्चा और बच्चे की जान पर भी संकट की स्थिति रहती है. स्वस्थ शिशु के लिये माताओं का स्वस्थ रहना जरूरी है.

जीविका के 52 हजार समूहों ने सर्वे कर कुपोषित गर्भवतियों, माताओं और बच्चों का डाटा संग्रह किया है. जीविका की सदस्य घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों और महिलाओं को पोषण संबंधी जानकारी देगी और उसे रेड जोन से ग्रीन जोन में लाने का प्रयास करेगी. इसके लिए जीविका की ओर से कार्ययोजना बनायी जा रही है. – शोभा साव, स्वास्थ्य व पोषण प्रबंधक, जीविका

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Navendu Shehar Pandey

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By Navendu Shehar Pandey

Navendu Shehar Pandey is a contributor at Prabhat Khabar.

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