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15 साल पुरानी गाड़ियों का दरभंगा करा सकते हैं स्क्रैप

Updated at : 07 Aug 2024 9:07 PM (IST)
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15 साल पुरानी गाड़ियों का दरभंगा करा सकते हैं स्क्रैप

15 साल पुरानी गाड़ियों का दरभंगा करा सकते हैं स्क्रैप

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स्क्रैप कराने के बाद डीटीओ ऑफिस में निबंधन रद्द का देना होगा आवेदन मुजफ्फरपुर. 15 साल पुराने हो चुके वैसे वाहन जो चलने योग्य नहीं है वाहन मालिक उसे कहां स्क्रैप कराये. यह उनके लिए सिरदर्द बना हुआ है. इसको लेकर वह पसोपेश में है कि जिले में स्क्रैप सेंटर है नहीं तो कहां जाये. ऐसे में वाहन मालिक नजदीक के जिले दरभंगा में स्क्रैप करा सकते हैं. इसके अलावा पटना, नालंदा, भागलपुर, रोहतास में स्क्रैप सेंटर खुल चुका है. वाहन मालिकों को गाड़ियों को स्क्रैप कराने के लिए गाड़ी का ऑनरबुक लेकर वहां जाना होगा और साथ में पहचान के लिए अपना आधार कार्ड लेकर जायेंगे. जहां गाड़ी स्क्रैप के बाद उन्हें एक सर्टिफिकेट स्क्रैप सेंटर से प्रदान होगा. इसके बाद वह सर्टिफिकेट लेकर डीटीओ ऑफिस में अपने गाड़ी के निबंधन रद्द करने के लिए आवेदन करेंगे, जिसके बाद उनका निबंधन रद्द किया जायेगा और उन्हें एक प्रमाण पत्र मिलेगा. इसके आधार पर जब वह नयी गाड़ी खरीदेंगे तो उन्हें उसके निबंधन शुल्क में कुछ छूट का प्रावधान है जो उन्हें मिलेगा. इस संबंध में एमवीआइ राकेश रंजन ने बताया कि नजदीक में दरभंगा व पटना में स्क्रैप सेंटर खुला है जहां गाड़ी मालिक जाकर अपने 15 साल पुराने गाड़ी का स्क्रैप करा सकते हैं. 15 साल पुराने गाड़ी को बेचने से अच्छा स्क्रैप बहुत से लोग अपने 15 साल पुराने गाड़ी को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच देते हैं. लेकिन वह भूल जाते हैं कि 15 साल पुरानी गाड़ी बेचने से उनकी जवाबदेही समाप्त नहीं होगी. क्योंकि परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में वह गाड़ी पहले ऑनर के नाम पर ही रहती है. दूसरे खरीदार द्वारा उस गाड़ी से कोई घटना व दुर्घटना होती है तो उसकी जवाबदेही उन्हीं के ऊपर आयेगी. 15 साल पुरानी गाड़ी का ट्रांसफर तक नहीं होगा जब तक कि उसका दोबारा 5 साल के निबंधन ना हो जाये. अभी 15 साल पुराने वैसे वाहन जिसका ऑनरबुक पुराने किताब वाले फॉरमेट में उसके निबंधन की प्रक्रिया जटिल है, स्थानीय परिवहन कार्यालय में उसका भौतिक सत्यापन के बाद उसकी इंट्री के लिए उस पेपर को पटना मुख्यालय भेजा जाता है, जहां से अनुमति मिलने के बाद उस गाड़ी का दोबारा निबंधन होता है. अब तक करीब ढाई सौ से अधिक आवेदन पटना मुख्यालय जा चुके हैं जिसमें से मुश्किल से दो दर्जन में ही निबंधन की अनुमति प्रदान की गयी है. ऐसे में वाहन मालिक 15 साल पुराने गाड़ी को या तो दोबारा निबंधन कराकर ट्रांसफर कर किसी को दे, नहीं तो उसे स्क्रैप कराये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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