जिसमें इंसानियत नहीं हो, वो मुसलमान नहीं

मुजफ्फरपुर : ज़ुल्म और अत्याचार के खिलाफ खामोश नहीं रहो, बल्कि उसके खिलाफ आवाज बुलंद करना इस्लाम का भी पैगाम है. इस्लाम पहले आदमी को अच्छा इंसान देखना चाहता है. इसमें इंसानियत नहीं हो, वो मुसलमान नहीं हो सकता. यही इस्लाम की विचारधारा है. जिसे लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है. उक्त बातें लखनऊ से […]
मुजफ्फरपुर : ज़ुल्म और अत्याचार के खिलाफ खामोश नहीं रहो, बल्कि उसके खिलाफ आवाज बुलंद करना इस्लाम का भी पैगाम है. इस्लाम पहले आदमी को अच्छा इंसान देखना चाहता है. इसमें इंसानियत नहीं हो, वो मुसलमान नहीं हो सकता. यही इस्लाम की विचारधारा है. जिसे लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है.
उक्त बातें लखनऊ से आये मौलाना इंतेजाम हैदर जैदी ने मुकर्री स्थित प्रो मिर्जा मोबारक के आवास पर मिर्जा अली अब्बास के चेहलुम को खिताब फरमाते हुए कही.
मौलाना ने कहा के कानों से सुनी बातों को बुद्धि, विवेक के साथ समझ कर ही किसी की बातों को मानना चाहिए. इस्लाम दीने अक्ल है और जिन लोगों ने अक्ल का इस्तेमाल किये बिना ही जीवन व्यतीत किया, वो दुनिया में पछताते हैं. उन्होंने कहा कि किसी की भक्ति अच्छी बात है पर अंध भक्त नहीं बनें.
मौलाना ने कहा कि इस्लाम अक्ल के माध्यम से अच्छे बुरे में अंतर समझने का हुक्म देता है. उन्होंने कहा कि माता पिता की सेवा करना अल्लाह का हुक्म है. हमें सच्चे दिल से उनकी सेवा करना चाहिए. मजलिस के आरंभ में कुरानख्वानी हुई. सोजखानी अब्बास हुसैन मुन्ना ने की. मोहम्मद रजा आब्दी, तनवीर चैनपुरी, मौलाना शब्बर रजा ने पेशखानी की. संचालन सैयद मोहम्मद बाकिर ने किया.
इस मौके पर मौलाना नेहाल हैदर, मौलाना वेकार अहमद, मौलाना इफ्तेखार, तनवीर रजा विक्टर, असद यावर, सैयद साकिब रजा, आबिद असगर, अली अब्बास हुसैन, इरशाद हुसैन गुड्डू, यावर हुसैन, अली अब्बास आब्दी, मिर्जा हसन अब्बास, मिर्जा मेहदी अब्बास, मिर्जा तकी अब्बास मुख्य रूप से मौजूद थे.
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