इंटर्न व पीजी छात्रों ने बंद कराया ओपीडी, पांच सौ मरीज लौटे
Updated at : 09 Apr 2019 6:16 AM (IST)
विज्ञापन

मुजफ्फरपुर : विभिन्न मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार को एसकेएमसीएच का ओपीडी बंद करा दिया. इससे दिनभर मरीजों का इलाज नहीं हो सका. बाहर से आनेवाले मरीज परेशान रहे. ओपीडी बंद होने से 500 से अधिक मरीज बिना इलाज लौट गये. प्रत्येक सोमवार को यहां ओपीडी में तीन हजार के करीब मरीज इलाज […]
विज्ञापन
मुजफ्फरपुर : विभिन्न मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार को एसकेएमसीएच का ओपीडी बंद करा दिया. इससे दिनभर मरीजों का इलाज नहीं हो सका. बाहर से आनेवाले मरीज परेशान रहे. ओपीडी बंद होने से 500 से अधिक मरीज बिना इलाज लौट गये. प्रत्येक सोमवार को यहां ओपीडी में तीन हजार के करीब मरीज इलाज कराते हैं, लेकिन बंद होने के कारण 792 मरीज का ही रजिस्ट्रेशन किया गया. वहीं 393 मरीज को इमरजेंसी में दिखाया गया. इसमें से 60 गंभीर मरीज को भर्ती किया गया.
जूनियर डॉक्टरों ने बताया कि एम्स में एमबीबीएस करने वाले छात्रों को वहां पीजी नामांकन के लिए 50 फीसदी सीट निर्धारित है. बची हुई सीटों पर भी वहां के छात्र कंपीटीशन से नामांकन ले सकते हैं. इससे सीटों की संख्या कम हो गयी है और कंपीटीशन बढ़ गया है. बिहार के मेडिकल कॉलेजों से निकले छात्रों को एम्स पीजी में कम भागीदारी मिलती है.
वहीं एम्स के इंटर्न छात्रों को अधिक भत्ता मिलता है. अन्य मेडिकल छात्रों को 14 हजार रुपये ही भत्ता के रूप में दिया जाता है, जबकि पीजी छात्रों को 40 हजार रुपये भत्ता मिलता है.
डॉक्टरों का कहना था कि बिहार के एम्स को छोड़ कर अन्य मेडिकल अस्पताल के एसआर डॉक्टरों के लिए न्यूनतम उम्रसीमा 45 वर्ष से कम की जाये.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




