ब्रेल लिपि से पढ़ मंजिल पा रहे दृष्टिहीन बच्चे
Updated at : 04 Jan 2019 7:48 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : आंखें नहीं तो क्या हुआ, पढ़ाई का जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है. भगवानपुर फरदो गोला स्थित शुभम विकलांग विकास संस्थान की छात्र-छात्राएं ऐसे ही हौसले का परिचय देकर अपनी मंजिल तय कर रहे हैं. इस स्कूल की स्थापना एलएस कॉलेज में संस्कृत की प्रोफेसर डॉ संगीता अग्रवाल ने वर्ष […]
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मुजफ्फरपुर : आंखें नहीं तो क्या हुआ, पढ़ाई का जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है. भगवानपुर फरदो गोला स्थित शुभम विकलांग विकास संस्थान की छात्र-छात्राएं ऐसे ही हौसले का परिचय देकर अपनी मंजिल तय कर रहे हैं. इस स्कूल की स्थापना एलएस कॉलेज में संस्कृत की प्रोफेसर डॉ संगीता अग्रवाल ने वर्ष 1992 में की थी.
जन्मजात दृष्टिहीन डॉ संगीता ने शहर में दृष्टिहीनों के लिए स्कूल नहीं होने के कारण अपनी पढ़ाई दिल्ली में की थी. वर्ष 1992 में वापस शहर लौटने के बाद उन्होंने दिव्यांगों के लिए स्कूल खोला. दिव्यांग परिवारों में जाकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया.
डॉ संगीता कहती हैं कि उस वक्त एक बच्चा पढ़ने के लिए आता था, लेकिन लोगों में जैसे-जैसे जागरूकता आयी, बच्चों को स्कूल भेजने लगे. फिलहाल यहां 83 बच्चे हैं, जिनमें 46 दृष्टिहीन हैं. सभी को मुफ्त पढ़ाई के साथ छात्रावास की सुविधा भी दी गयी है. स्कूल में बच्चों को अत्याधुनिक तकनीक से शिक्षा दी जा रही है. कंप्यूटर व मोबाइल एप के जरिये बच्चे पढ़ते हैं.
व्यवस्था संभाल रहे सत्येंद्र कुमार मिश्र कहते हैं कि ब्रेल लिपि से पढ़ने के लिए किताबें बहुत मोटी हो जाती हैं. हालांकि स्टडी डिवाइस डेजी प्लेयर व मोबाइल एप की सुविधा से पढ़ाई आसान हो जाती है. कंप्यूटर में जॉज सॉफ्टवेयर के जरिये बच्चे सुगम्य पुस्तकालय को ओपेन कर पढ़ाई करते हैं. यहां बच्चे विशेष तरह के बॉल से क्रिकेट व फुटबाल भी खेलते हैं.
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