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मुजफ्फरपुर : आधी आबादी ठान ले तो पॉलीथिन से छुटकारा

Updated at : 12 Dec 2018 3:37 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर :  आधी आबादी ठान ले तो पॉलीथिन से छुटकारा

मुजफ्फरपुर : 14 दिसंबर से पॉलीथिन पर लगने वाले प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकार व प्रशासन की तरफ से लोगों को जागरूक करने के लिए अलग-अलग कदम उठाये जा रहे हैं. शहरी क्षेत्र में कार्य करने वाली कई एनजीओ अपने स्तर से जागरूकता फैला रही है, लेकिन इस अभियान को […]

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मुजफ्फरपुर : 14 दिसंबर से पॉलीथिन पर लगने वाले प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकार व प्रशासन की तरफ से लोगों को जागरूक करने के लिए अलग-अलग कदम उठाये जा रहे हैं. शहरी क्षेत्र में कार्य करने वाली कई एनजीओ अपने स्तर से जागरूकता फैला रही है, लेकिन इस अभियान को सफल बनाने के लिए आधी आबादी को जागरूक होना अति आवश्यक है.
आधी आबादी के जागरूकता के बिना पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने का अभियान सफल नहीं हो सकता है. इसके लिए शहर की महिला संगठनों को आगे आने की जरूरत है. नगर आयुक्त संजय दूबे का कहना हैं कि प्रकृति ईश्वर की अनुपम देन है. इसे संजोए रखना हम सभी का कर्तव्य है. इसलिए हम सभी को पॉलीथिन से होने वाले प्रदूषण के बचाव के लिए बढ़-चढ़ कर आगे आना हाेगा.
हर कोई को इससे निपटने के लिए अपना सहयोग देना होगा. महिलाओं की भूमिका सबसे ज्यादा होंगी. क्योंकि, महिलाएं अगर चाह जायेंगी, तो किसी भी घर में पॉलीथिन का उपयोग नहीं होगा. महिलाएं समाज की एक ऐसा अंग है. जो घर के बच्चे के साथ बुजुर्ग व नौजवानों को ब्रेन वाश कर शत प्रतिशत पॉलीथिन उपयोग करने से मना कर सकती हैं.
कुमारी काजल (फैशन डिजाइनर) शहर के हर व्यक्ति को पॉलीथिन को प्रतिबंध करने में सहयोग देना होगा. बच्चे हो या बूढ़े, स्त्री हो या पुरुष, शिक्षित हो या अशिक्षित, गरीब हो या अमीर. सभी को इससे निजात पाने के लिए सहृदय काम करना होगा. परिवार के बड़े सदस्य स्वयं पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करेंगे, तो स्वत: बच्चे व अन्य लोग इसका उपयोग करना बंद कर देंगे.
शिप्रा आनंद (गृहिणी) : सरकार ने अभी जो कदम उठाया है. यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला तेजी से प्रदूषित हो रहे वातावरण को बचाने वाला है. हम खुद जागरूक होंगे. आसपास के लोगों से भी अपील करती हूं कि वे पॉलीथिन का उपयोग करना बंद कर दें. बाजार खरीदारी करने जाये, तो अपने साथ जूट या कपड़े निर्मित थैले लेकर जाएं. अगर दुकानदार पॉली में समान दें, तो उनको इसका प्रयोग करने से रोकने के साथ पॉलीथिन का बहिष्कार करें.
डॉ अर्चना भारती (प्राध्यापिका): सरकार व प्रशासन सख्ती से पॉलीथिन के खिलाफ अभियान चला इसे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करें. लोगों को भी जागरूक होकर पॉलीथिन का उपयोग करना बंद कर देना चाहिए. इससे जरूरत दिन प्रति दिन कम होती चली जायेगी और एक ऐसा समय आयेगा. जब पॉलीथिन का पूरे वातावरण से सफाया हो जायेगा. सरकारी तंत्र को चाहिए कि वह इस निर्माण में लगी फैक्टरियों को ही बंद करा दें.
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