चेक बाउंस मामले में पूर्व मुखिया को देना होगा 4.10 करोड़ का मुआवजा

Updated at : 26 Sep 2017 2:17 PM (IST)
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चेक बाउंस मामले में पूर्व मुखिया को देना होगा 4.10 करोड़ का मुआवजा

मुजफ्फरपुर:बिहारके मुजफ्फरपुर में दो करोड़ पांच लाख रुपये के चेक बाउंस मामले एसीजेएम 13 अमित कुमार दीक्षित ने धारा 138 एनआई एक्ट में मीनापुर प्रखंड के गोरीगामा पंचायत के पूर्व मुखिया सुधीर कुमार को दो वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये अथर्दंड की सजा सुनायी है. साथ ही उन्हें चेक बाउंस की दुगुनी राशि4 […]

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मुजफ्फरपुर:बिहारके मुजफ्फरपुर में दो करोड़ पांच लाख रुपये के चेक बाउंस मामले एसीजेएम 13 अमित कुमार दीक्षित ने धारा 138 एनआई एक्ट में मीनापुर प्रखंड के गोरीगामा पंचायत के पूर्व मुखिया सुधीर कुमार को दो वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये अथर्दंड की सजा सुनायी है. साथ ही उन्हें चेक बाउंस की दुगुनी राशि4 करोड़ दस लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है. सुधीर कुमार टेंगराहां गांव के हैं. अथर्दंड की राशि नहीं देने पर उन्हें तीन माह अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा होगी.

टेंगराहां गांव के अमित कुमार के परिवाद पर विचारण के बाद एसीजेएम एके दीक्षित ने यह फैसला सुनाया. मुआवजे की राशि अमित कुमार को मिलेगी. मीनापुर थाना के टेंगराहां गांव के अमित कुमार ने सात अगस्त 2012 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में परिवाद दायर किया था. इसमें गोरीगामा पंचायत के तत्कालीन मुखिया सुधीर कुमार सिंह को आरोपित किया था.

क्या था मामला
मीनापुर थाना के टेंगराहां गांव के अमित कुमार की अोर से दायर परिवाद में गोरीगामा पंचायत के तत्कालीन मुखिया सुधीर कुमार सिंह को आरोपित किया था. परिवाद में कहा गया था कि अरुणाचल प्रदेश के रोइंग जिला के मेसर्स अंब्रे ट्रेड एजेंसी ने 2010 में पावर ऑफ अटॉर्नी के रूप में नियुक्त किया था. यह पावर ऑफ अटॉर्नी उसे दो साल के लिए दी गयी थी. कंपनी के मालिक मगाने अंब्रे ने यह पावर दिया था. इसके तहत एनएचपीसी लिमिटेड ने रोड निर्माण का कार्य दिया.

एनएचपीसी के नियमानुसार समय-समय पर बैंक गारंटी जमा की जो लगभग 87 लाख 39 हजार 359 रुपये हुए. रोड निर्माण में समय-समय पर पूंजी लगायी और कार्य के अनुसार एनएचपीसी ने समय-समय पर इसका भुगतान भी किया. इसी बीच नियम तोड़कर पावर ऑफ अटॉर्नी दीपक कुमार को दे दी. इसके कारण उसके द्वारा कियेगये रोड निर्माण के काम का भुगतान बंद हो गया.

लगभग तीन करोड़ का भुगतान नहीं होने पर उन्होंने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दीपक कुमार को राशि भुगतान का आदेश दिया. इसके बदले दीपक कुमार ने 20 लाख 69 हजार रुपये उसके एकाउंट में जमा कराए. एजेंसी ने जनवरी 2012 में पावर ऑफ अटॉर्नी सुधीर कुमार को दे दी. जिससे बची राशि के भुगतान की जिम्मेदारी सुधीर कुमार की हो गयी. सुधीर कुमार ने इसके बदले दो करोड़ पांच लाख का चेक दिया. चेक को जब अपने खाते में डाला तो बाउंस हो गया.

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