80 वर्षों की हड्डी में जगा जोश पुराना था, सब कहते हैं बाबू वीर कुंवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था...

Published by :BIRENDRA KUMAR SING
Published at :23 Apr 2026 7:16 PM (IST)
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80 वर्षों की हड्डी में जगा जोश पुराना था, सब कहते हैं बाबू वीर कुंवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था...

80 वर्षों की हड्डी में जगा जोश पुराना था, सब कहते हैं बाबू वीर कुंवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था...

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बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती सह शौर्य दिवस पर उनकी प्रतिमा पर किया गया माल्यार्पण

फोटो संख्या –

मुंगेर

बिहार की पावन धरती के महान बलिदानी, अदम्य साहस और अद्वितीय पराक्रम के प्रतीक, स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती सह शौर्य दिवस गुरुवार को सम्मान के साथ मनाया गया. विभिन्न राजनीतिक, गैर राजनीतिक संगठनों की ओर से टैक्सी स्टैंड के समीप वीर कुंवर सिंह पार्क में स्थित उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके शौर्यगाथा पर विस्तार से चर्चा की.

बाबू वीर कुंवर सिंह की शौर्यगाथा से हमें मिलती है प्रेरणा

भोजपुरी परिषद की ओर से बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती सह शौर्य दिवस पर टैक्सी स्टैंड मुंगेर स्थित वीर कुंवर सिंह पार्क में उनके स्मारक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उनक आदमकद प्रतिमा पर भोजपुरी परिषद के अध्यक्ष कौशल किशोर पाठक एवं सचिव रविशंकर पांडेय के द्वारा माल्यार्पण किया गया. अध्यक्ष ने कहा की बाबू वीर कुंवर सिंह ने 80 वर्ष की उम्र में भी अदम्य साहस देखते हुए 23 अप्रैल 1858 को अंग्रेज कैप्टन ली ग्रैंड की अंग्रेजी सेना को हरा कर जगदीशपुर में पुनः अपना झंडा फहराया था. इस जीत के उपरान्त लोगों ने विजयोत्सव मनाएं थे, उस समय से हीं हर वर्ष 23 अप्रैल को विजयोत्सव सह शौर्य दिवस के रूप में हम सब मनाते हैं. जो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उनके ऐतिहासिक जीत और वीरता का प्रतीक है. स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह का नाम जेहन में आते हीं उस वीरता की गाथा याद आती है जिसने अपनी वीरता से अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे. 80 वर्ष की उम्र में भी देश की आजादी के लिए संघर्ष करना आज भी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है. मौके पर अभिषेक पाण्डेय, विजेन्द्र यादव ऊर्फ विजय कुमार, सरस्वती शिशु मंदिर बेकापुर के आचार्य रीतेश कुमार शर्मा, सुमित कुमार मिश्रा, मुंगेर सेवा मंच के संजय कुमार बबलु, लायंस क्लब आफ मुंगेर सिटी के संजय कुमार चमडिया ने भी राष्ट्र सपूत बाबू वीर कुंवर सिंह के प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किया. इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर बेकापुर के भैया अर्णव कुमार, अनिरुद्ध कुमार, आयुष कुमार, अंश कुमार, आदित्य राज, अयांश आर्य, बहन देवांशी प्रिया, सृष्टि रानी ने भी बाबू वीर कुंवर सिंह से जुड़े प्रेरक प्रसंगों की चर्चा की.

1857 क्रांति के महानायक थे बाबू वीर कुंवर सिंह

टैक्सी स्टैंड में वीर कुंवर सिंह पार्क में विभिन्न राजनीतिक व गैर राजनीतिक संगठनों ने सम्मलित होकर बाबू वीर कुंवर की जयंती शौर्य दिवस के रूप में मनाया. उपस्थित लोगों ने उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. वक्ताओं ने कहा कि 80वर्ष की आयु में भी मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका अद्वितीय शौर्य और त्याग हर भारतीय के लिए सदैव प्रेरणास्त्रोत रहेगा. उनका जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस और समर्पण का जीवंत उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा. वक्ताओं ने कहा कि वे 1857 क्रांति के महानायक थे. जिन्होंने गोली लगने के बाद उन्होंने अपना हाथ काट कर गंगा में बहा दिया था. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कुछ नाम ऐसे है जिनकी वीरता समय की सीमाओं को पार कर आज भी प्रेरणा देती है. इन्हीं में थे बाबू वीर कुंवर सिंह. मौके पर करणी सेना के रामकुमार सिंह, कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह, पूर्व वार्ड पार्षद रणधीर सिंह, अंकित कमार सिंह, संजय केशरी, सुबोध तांती, अमर रत्नम सहित अन्य मौजूद थे.

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