उर्दू भाषा के विकास को लेकर मुंगेर में कार्यशाला, सेमिनार व मुशायरा का आयोजन मुंगेर. मुंगेर के प्रेक्षागृह में शनिवार को जिला उर्दू भाषा कोषांग द्वारा कार्यशाला, सेमिनार व मुशायरा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन अपर समाहर्ता मनोज कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर जिले के सभी प्रखंडों से विभिन्न विद्यालयों व महाविद्यालयों के उर्दू भाषी छात्र-छात्राएं, शिक्षक तथा प्रोफेसर बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. अपर समाहर्ता मनोज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू निदेशालय की ओर से उर्दू भाषा के विकास व उन्नति के लिए निरंतर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि उर्दू को बिहार राज्य की द्वितीय राजभाषा के रूप में लागू किया गया. उन्होंने बताया कि गैर-उर्दूभाषी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों व आम इच्छुक लोगों के लिए उर्दू सीखने का 70 दिवसीय निःशुल्क ऑनलाइन प्रशिक्षण कोर्स भी संचालित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में उर्दू के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए उर्दू में आवेदन व पत्राचार प्राप्त करने और उसका उत्तर उर्दू में देने की व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके साथ ही जिला राजपत्र, सरकारी विज्ञापन व महत्वपूर्ण साइनबोर्ड का उर्दू संस्करण प्रकाशित व स्थापित कराया जाता है, जिसकी अनुशंसा व फॉलोअप जिला स्तर पर किया जाता है. उर्दू निदेशालय के माध्यम से साहित्यिक एवं शैक्षिक कार्यक्रमों के आयोजन से सामाजिक सद्भाव और साझा सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिलती है. अपर समाहर्ता ने यह भी कहा कि उर्दू भाषा के विद्यार्थी जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनका लाभ लेकर कई छात्र-छात्राएं सरकारी नौकरी भी हासिल कर रहे हैं. कार्यक्रम के उपरांत आयोजित मुशायरे में कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया. जावेद अख्तर आजाद, इकवाल अहमद इकबाल, ईमामउद्दीन अनीस, अंजुम हसन हलचल, एहतिशाम आलम, शंकर कैमुरी, मो अब्दुश शकुरू अंसारी, मो हुसैन, मो साबिर अनवर, मो तकी अशरफ व एहसान अनवर ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी. मौके पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी राघवेन्द्र कुमार दीपक, वरीय उप समाहर्ता मो वसीम रजा, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (शिक्षा) फर्रुख रहमान, विद्या सागर, प्रो. शाहिद रजा जमाल, प्रो जैनुल हक शमशी, अब्दुल्ला बुखारी, डॉ सबीहा नसरीन, सैयद मो अकील, रईस उर रजा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे.
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