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20 हजार लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 14 हजार दिव्यांगों कर अब तक बना यूडीआईडी

Updated at : 02 Dec 2024 8:30 PM (IST)
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विश्व दिव्यांग दिवस आज

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एक समावेशी और टिकाऊ भविष्य के लिए दिव्यांग व्यक्तियों के नेतृत्व को बढ़ावा देना है थीम

मुंगेर

जिले में अबतक 14 हजार दिव्यांगों का वन नेशन यूनिक डिस्बेलिटी आइडी (यूडीआईडी) बनाया गया है. इसके जरिये जिले के दिव्यांग बिहार सहित दूसरे राज्यों में रहकर भी सरकार की दिव्यांगों को लेकर चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ ले रहे हैं. हालांकि अब भी जागरूकता के अभाव में कई दिव्यांग अपने लिए यूडीआईडी नहीं ले पाये हैं. वैसे स्वास्थ्य विभाग अब प्रत्येक गुरुवार को दिव्यांगता जांच शिविर आयोजित कर दिव्यांगों को दिव्यांगता सर्टिफिकेट उपलब्ध करा रहा है.

पूरे विश्व में मंगलवार को विभिन्न दिव्यांगता से पीड़ित लोगों के लिए अंतराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाया जायेगा. इस साल थीम “एक समावेशी और टिकाऊ भविष्य के लिए दिव्यांग व्यक्तियों के नेतृत्व को बढ़ावा देना ” है. यह विषय दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा सभी के लिए अधिक समावेशी और टिकाऊ दुनिया बनाने में निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है. जबकि दिव्यांगों के लिये राज्य और केंद्र सरकार द्वारा न केवल कई प्रकार की योजनाएं चलायी जा रही है, बल्कि कई प्रकार की सुविधाएं भी सरकार दे रही है, ताकि दिव्यांग समाज में अपनी एक पहचान बनाते हुए स्वाबलंबी जीवन व्यतीत कर सकें.

14 हजार दिव्यांगों का अब तक बना यूडीआईडी

किसी भी प्रकार के शारीरिक दिव्यांग से पीड़ित लोगों को सरकार द्वारा वन नेशन यूनिक डिस्बेलिटी आइडी कार्ड (यूडीआईडी) दिया जा रहा है. जिससे कोई भी दिव्यांग पूरे देश में कहीं भी सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ ले सके. मुंगेर जिले में अबतक 14 हजार दिव्यांगों का यूडीआईडी स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाया गया है. हालांकि पोर्टल पर लगभग 17 हजार आवेदन आने के बाद सरकार ने जिले में 20 हजार दिव्यांगों को दिव्यांगता सर्टिफिकेट अर्थात यूडीआईडी बनाने का लक्ष्य मुंगेर स्वास्थ्य विभाग को दिया है.

प्रत्येक गुरुवार को लगता है दिव्यांगता शिविर

मुंगेर जिला मुख्यालय के सदर अस्पताल में प्रत्येक गुरुवार को दिव्यांगता शिविर का आयोजन किया जाता है. यूडीआईडी कार्ड के लिये पहले किसी भी प्रकार के दिव्यांगता से पीड़ित लोग ऑनलाइन पोर्टल द्वारा आवेदन कर सकते हैं. इसके लिये उनके पास आधार कार्ड, आवासीय प्रमाण पत्र तथा फोटो होना आवश्यक है. इसके बाद अगले गुरुवार को दिव्यांग सिविल सर्जन कार्यालय में आयोजित होने वाले दिव्यांगता शिविर में पहुंकर अपनी जांच करा सकते हैं. जहां सभी प्रकार की दिव्यांगता की जांच अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा की जाती है. इसके आधार पर ही दिव्यांगता का प्रतिशत निर्धारित करते हुए दिव्यांगता की श्रेणी निर्धारित की जाती है. वहीं जांच के तीन से चार दिनों के अंदर दिव्यांग मरीजों को यूडीआईडी उपलब्ध करा दिया जाता है.

अब ईएनटी के दिव्यांगों की भी हो रही जांच

बता दें कि मुंगेर जिले में सालों से ईएनटी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण केवल फिजिकल, हड्डी तथा नेत्र के दिव्यांगों की ही जांच होती थी, लेकिन बीते दिनों सरकार द्वारा मुंगेर जिले को एक ईएनटी विशेषज्ञ के रूप में डॉ रजनीश रंजन की नियुक्त की गयी है. इससे अब मुंगेर में ईएनटी के दिव्यांगों की जांच भी आरंभ हो गयी है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि सदर अस्पताल में प्रत्येक गुरुवार को दिव्यांगता जांच शिविर का आयोजन किया जाता है. जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा दिव्यांगता की जांच की जाती है. वहीं अब मुंगेर में नाक, कान व गले के दिव्यांगों की जांच भी आरंभ हो गयी है. जांच के 3 से 4 दिन बाद ही दिव्यांगों को यूडीआइडी उपलब्ध कराया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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