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विलंबित जन्म-मृत्यु की घटनाओं के रजिस्ट्रीकरण में बरतें सावधानी : डीडीसी

Updated at : 12 Dec 2025 7:13 PM (IST)
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विलंबित जन्म-मृत्यु की घटनाओं के रजिस्ट्रीकरण में बरतें सावधानी : डीडीसी

संग्रहालय सभागार में शुक्रवार को जन्म एवं मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता उप विकास आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने की.

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जन्म व मृत्यु रजिस्ट्रीकरण को लेकर दिया गया प्रशिक्षण

मुंगेर. संग्रहालय सभागार में शुक्रवार को जन्म एवं मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता उप विकास आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने की. प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को इसको लेकर विस्तृत जानकारी दी गयी.

डीडीसी ने विलंबित जन्म-मृत्यु की घटनाओं के रजिस्ट्रीकरण में सावधानी बरतने का निर्देश दिया, जबकि विलंबित घटनाओं के स्थिति में अगर ज्यादा पुरानी घटना हो तो उसके चरणों के संबंध में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करने को कहा. साथ ही पूछा गया कि इतने विलंब से रजिस्ट्रेशन क्यों कराया जा रहा है. उन्होंने उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि जन्म-मृत्यु के रजिस्ट्रेशन का अत्यधिक महत्व है और इस काम को गंभीरता से लेना चाहिए. प्रभारी जिला सांख्यिकी पदाधिकारी सह अपर जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) आनंद प्रकाश ने जन्म और मृत्यु अधिनियम 1969, बिहार जन्म और मृत्यु नियमावली 1999, जन्म और मृत्यु (संशोधन) अधिनियम, 2023, बिहार जन्म मृत्यु (संशोधन) नियमावली 2025 के धाराओं एवं नियमों के संबंध में विस्तृत जानकारी पीपीटी के माध्यम से दी. उन्होंने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के अलावा ग्रामीण इलाकों में पंचायत स्तर एवं नगर इलाकों में नगर निकाय स्तर पर रजिस्ट्रार कार्य के लिए सरकार द्वारा नियुक्त किये गए हैं. सरकारी चिकित्सा संस्थानों में विलंबित जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का रजिस्ट्रेशन नहीं होता है.

जन्म-मृत्यु की तिथि से 21 दिनों के अंदर निःशुल्क रजिस्ट्रेशन किया जाता है. एक महीने से एक वर्ष के बीच विलंबित रजिस्ट्रेशन करने पर पांच, जबकि एक वर्ष से अधिक के घटनाओं के विलंबित रजिस्ट्रेशन की स्थिति में 10 का विलंब शुल्क आवेदक को देना पड़ता है. एक महीने से एक वर्ष के बीच की विलंबित घटनाओं की स्थिति में प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी द्वारा अनुमोदन करने के उपरांत जन्म मृत्यु की घटना का रजिस्ट्रीकरण संबंधित रजिस्टर द्वारा किया जाता है. एक वर्ष से ऊपर की विलंबित घटनाओं की रजिस्ट्रेशन के लिए ग्रामीण इलाकों में प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं नगरी इलाकों में कार्यपालक पदाधिकारी की अनुमति अनिवार्य है. सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी राजेश कुमार दास एवं कंचन कुमार ने भी विभिन्न धाराओं, नियमों के संबंध में जानकारी दी. प्रशिक्षण में सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, कार्यपालक पदाधिकारी, विभिन्न सरकारी अस्पतालों के चिकित्सा पदाधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIRENDRA KUMAR SING

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By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

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