पथिक आश्रम में तीन दिवसीय भागवत कथा प्रारंभ

भक्ति दो प्रकार की होती है
असरगंज स्वामी सुबोधानंद जी ने कहा है कि संत स्वभाव से ही परोपकारी और प्राणी मात्र के हितैषी होते हैं. वे प्राणिमात्र के कल्याण में तत्पर रहते हैं. वे शुक्रवार को असरगंज नागा निरंकारी संत पथिक आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय कथा का शुभारंभ करते हुए कही. उन्होंने कहा कि संत स्वप्न में भी किसी का बुरा नहीं सोचते हैं. संत तो अपना अपमान, तिरस्कार सहकर भी दुष्टजनों को समझाने का पूर्ण प्रयत्न करते हैं. उदाहरण स्वरूप विभीषण जी भरे दरबार में रावण की लात खाकर एवं कठोर वचन सुनकर भी रावण को कल्याणकारी बातें सुनाते हैं. विदुर जी और भीष्म पितामह के बारंबार अपमान व तिरस्कार करते रहने पर भी दुर्योधन को कर्तव्य धर्म का उपदेश सुनाते रहते हैं. उन्होंने कहा कि भक्ति दो प्रकार की होती है. साधन रूपी भक्ति और प्रेमा भक्ति. प्रेमा भक्ति का मतलब है भगवान के चरणों में अनन्य प्रेम प्रकट हो जाना. साधन भक्ति का अभ्यास करते-करते हृदय में भगवान के प्रति प्रेम प्रकट हो जाता है. फिर भगवान का साक्षात दर्शन हो जाता है और भगवत की प्राप्ति हो जाती है. मौके पर हरिद्वार के रंजीत बाबा, शंकर बाबा, मन्नू साह, रामेश्वर साह, कार्तिक साह, डॉ महेश, सीताराम मंडल सहित महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे.
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