खनन विभाग को फिर नहीं मिला 22 गंगा बालू घाटों के संवेदक, धड़ल्ले से जारी है अवैध उत्खनन

खनन विभाग को फिर नहीं मिला 22 गंगा बालू घाटों के संवेदक, धड़ल्ले से जारी है अवैध उत्खनन
बालू माफिया दिन-रात गंगा के गर्भ से चोरी कर रहा सफेद बालू, सरकार को भारी राजस्व का हो रहा नुकसान
मुंगेर. खनन विभाग मुंगेर की ओर से जिले के 22 गंगा बालू घाटों (सफेद बालू) की बंदोबस्ती के निविदा प्रकाशित की गयी थी. 15 जनवरी तक बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए ऑन लाइन आवेदन की अंतिम तिथि मुकर्रर की गयी थी. जिसके नीलामी के लिए 22 जनवरी को बोली लगने वाली थी. लेकिन अब इसकी बोली नहीं लगेंगी. क्योंकि बंदोबस्ती के लिए एक भी संवेदक ने आवेदन नहीं किया. जिसके कारण सरकार को भारी राजस्व की क्षति पहुंच रही है.22 बालू घाटों की होनी थी नीलामी
जिले में कुल 22 गंगा बालू घाट की बंदोबस्ती होनी है. इन बालू घाट का क्षेत्रफल 412.8 हेक्टेयर है. गंगा घाटों के क्षेत्रफल में बांटकर बंदोबस्ती की जायेगी. जिन बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए निविदा प्रकाशित किया गया था. उसमें काली स्थान फुलकिया बालू घाट एवं काली स्थान बरियारपुर गंगा बालू घाट को 6-6 भाग, पहाड़पुर गंगा बालू घाट को 5 भाग एवं महुला बालू घाट को 4 भाग में बांट गया है. जबकि टीकरामपुर में एक बालू घाट शामिल थी.तीन वर्ष में 6 बार निकली निविदा, नहीं मिल रहे संवेदक
जानकारी के अनुसार 2023 में गंगा किनारे आठ बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए तीन बार निविदा का प्रकाशन कराया गया था, लेकिन नीलामी में किसी भी संवेदक ने हिस्सा नहीं लिया था. वर्ष 2024 में निविदा निकाली गयी थी. लेकिन उसमें भी संवेदक ने भाग नहीं लिया था. पुन: दिसंबर 2025 में 22 बालू घाटों के लिए निविदा प्रकाशित किया था. जिसकी अंतिम तिथि 15 जनवरी 2026 तय की गयी थी. लेकिन इस बार भी एक भी संवेदक ने इसमें भाग नहीं लिया. जिसके कारण एक बार पुन: निविदा स्वत: रद्द हो जायेगी.———————————————————-
बालू माफिया सरकार के राजस्व पर डाल रहे डाका
मुंगेर :
जिन 22 बालू घाटों की बंदोबस्ती होनी है, उसमें मुंगेर शहर के लालदरजा से लेकर हेरूदियारा तक के गंगा घाट शामिल नहीं है. जबकि लालदरबाजा से कल्याणपुर घोरघट तक के घाट शामिल है. मुंगेर में बालू माफिया काफी सक्रिय है जो बिना टेंडर के ही गंगा बालू घाटों पर अवैध उत्खनन कर उसकी बिक्री करते हैं. जिससे सरकार को भारी राजस्व का नुकसान भी हो रहा है. इतना ही नहीं बालू माफियाओं की धाक इतनी है कि न तो खुद बालू घाट की बंदोबस्ती लेना चाहते हैं और न ही दूसरे संवेदक को बालू घाट की निविदा में भाग लेने दे रहे हैं. जबकि बड़ी-बड़ी परियोजना में सफेद बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है.सफेद बालू का करते है इस्तेमाल, मिट्टी का दे रहे रॉयल्टी
जानकारी के अनुसार हेमजापुर, पड़हम, फरदा, हेरूदियारा, दोमंठा, भेलवा, लालदरवाजा, टीकारामपुर, महुली, मय तोफिर, मनियारचक, बरियारपुर के गंगा घाटों से प्रतिदिन अहले सुबह सैकड़ों ट्रैक्टर व हाईवा अवैध उत्खनन किये गये सफेद बालू का उठाव करते हैं और निर्धारित स्थान पर उसे अनलोड कर देते है. प्रति टेलर दूरी के हिसाब से बालू का दर निर्धारित होता है. कई बड़े बालू माफिया बड़ी-बड़ी परियोजना में सेटिंग कर वहां बालू आपूर्ती करते हैं. खनन विभाग सफेद बालू का दर 75 रूपया घनमीटर निर्धारित है. परंतु बंदोबस्ती नहीं होने के कारण सभी संवेदक खनन विभाग को मिट्टी की रॉयल्टी 35 रूपया प्रति घनमीटर की दर से जमा कर विभाग को राजस्व का भारी नुकसान पहुंचा रहे है.
कहते हैं अधिकारी
प्रभारी जिला खनन पदाधिकारी कुमार रंजन ने बताया कि जिले में 22 गंगा बालू घाट (सफेद बालू) है. जिसकी कई वर्षों से बंदोबस्ती नहीं हुई. अगर कहीं भी सफेद बालू का उत्खनन हो रहा है तो वह पूरी तरह से अवैध है. इस बार बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए निविदा का प्रकाशन किया गया था. लेकिन निर्धारित तिथि 15 जनवरी तक एक भी संवेदक ने इसके लिए आवेदन नहीं किया. जिसके कारण इस बार भी गंगा बालू घाट की बंदोबस्ती संभव नहीं हो पायी.
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