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केवल टीबी मरीजों को दवा खिलाने तक ही समिति है स्वास्थ्य विभाग, जागरूकता का अभाव

Updated at : 26 Nov 2024 6:11 PM (IST)
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केवल टीबी मरीजों को दवा खिलाने तक ही समिति है स्वास्थ्य विभाग, जागरूकता का अभाव

शहरी व ग्रामीण सहित संग्रामपुर प्रखंड में टीबी के मरीज पाये गये हैं.

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– सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से अधिक निजी नर्सिंग होम व क्लीनिक में नोटिफाइड हो रहे टीबी के मरीज

– सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 1,206 तथा निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान मिले 1,463 मरीज

मुंगेर

क्षय रोग (टीबी) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु (या रोगाणु) के कारण होता है. जब कोई व्यक्ति टीबी के रोगाणुओं को सांस के माध्यम से अंदर लेता है, तो रोगाणु फेफड़ों में रह जाता है और बढ़ने लगता है. ऐसे में संक्रमित टीबी बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह बना है. हाल यह है कि टीबी के मरीजों को केवल दवा खिलाने और विशेष दिनों में ही कार्यक्रम कर लोगों को जागरूक करने तक ही स्वास्थ्य विभाग सिमटा है. जबकि जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थान सहित निजी नर्सिंग होम व क्लीनिक में नोटिफाइड होने वाले मरीजों में इसे लेकर पूरी तरह जागरूकता का अभाव दिख रहा है.

निजी नर्सिंग होम व क्लिनिकों में अधिक नोटिफाइड हो रहे मरीज

जनवरी से अक्तूबर 2024 तक कुल 2,080 टीबी के मरीज नोटिफाइड हुये हैं. जिसमें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जहां केवल 1,206 मरीज इस दौरान नोटिफाइड हुये हैं. वहीं इस दौरान निजी नर्सिंग होम व क्लिनिकों में इलाज के दौरान कुल 1,463 टीबी मरीज नोटिफाइड हुये. अब ऐसे में टीबी मरीजों के नोटिफाइड आंकड़ों से ही इसकी स्थिति समझी जा सकती है. इतना ही नहीं जिले में निजी इलाज के दौरान सर्वाधिक मुंगेर के शहरी व ग्रामीण सहित संग्रामपुर प्रखंड में टीबी के मरीज पाये गये हैं. इसमें जहां मुंगेर के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में निजी इलाज के दौरान 863 टीबी के मरीज मिले, वहीं संग्रामपुर में 492 टीबी के मरीज केवल निजी इलाज के दौरान मिले है.

जागरूकता की जगह दवा खिलाने में ही सिमटा स्वास्थ्य विभाग

सरकार देश को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है. जिसके लिये सरकार करोड़ो रूपये भी खर्च कर रही है, लेकिन मुंगेर स्वास्थ्य विभाग टीबी मुक्त बनने को लेकर केवल टीबी के नोटिफाइड मरीजों को दवा खिलाने तक ही सिमटा है. जबकि जागरूकता को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह है. यह हाल तब है, जब टीबी जैसी बीमारी संक्रमित मरीजों के खांसने या छिकने से ही हो जाती है. ऐसे में जहां सदर अस्पताल में टीबी के मरीज सामान्य मरीजों के साथ अपना इलाज करा रहे हैं. वहीं जिले में तो टीबी के मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं का तो हाल पूरी तरह बदहाल है.

कहते हैं जिला यक्ष्मा पदाधिकारी

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ ध्रुव कुमार ने बताया कि जिले में सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थानों में भी नोटिफाइड मरीजों को टीबी की समुचित दवा खिलायी जा रही है. इसके लिये जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक टीमों को लगाया गया है. जिनके द्वारा न केवल टीबी मरीज, बल्कि टीबी मरीज के परिवार के लोगों को भी दवा खिलायी जा रही है.

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बॉक्स

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प्रखंडवार सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थानों में मिले टीबी मरीज

प्रखंड सरकारी स्वास्थ्य केंद्र निजी स्वास्थ्य केंद्र

असरगंज 35 0

बरियारपुर 58 8

धरहरा 65 0

जमालपुर 198 25

तारापुर 129 22

मुंगेर 406 863

संग्रामपुर 86 492

टेटियाबंबर 52 1

हवेली खड़गपुर 177 22

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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