श्रीनिवास कल्याणोत्सव में बालाजी के दर्शन से भाव-विभोर हुई योग नगरी

योग गुरु परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती व स्वामी सत्यसंगी ने की बालाजी की विधिवत पूजा
पोलो मैदान में भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान श्रीनिवास के दिव्य विवाह का आयोजन
मुंगेर. मुंगेर शहर धार्मिक आस्था और भक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आया, जब पादुका दर्शन में स्वामी सत्यानंद सरस्वती के मुंगेर पदार्पण दिवस के अवसर पर श्रीनिवास कल्याणोत्सव कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया. मौके पर निकाली गयी शोभायात्रा ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया. जगह-जगह श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया और भगवान के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. दोपहर बाद तिरुपति बालाजी की उत्सव प्रतिमा को पोलो मैदान में विराजमान किया गया, जहां दर्शन को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. योग गुरु परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती एवं स्वामी सत्यसंगी ने बाला जी की विधिवत पूजा की. मौके पर प्रसिद्ध समाजसेवी निरंजन शर्मा सहित अन्य मौजूद थे.
वैदिक मंत्रोच्चारण व भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ माहौल
पादुका दर्शन में बिहार योग विद्यालय के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती के नेतृत्व में स्वामी सत्यानंद सरस्वती के मुंगेर पदार्पण दिवस तथा श्रीनिवास कल्याणोत्सव कार्यक्रम आयोजित हुआ. उनके नेतृत्व में पादुका दर्शन में धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गयी. सुबह से ही भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया. वैदिक मंत्रोच्चारण से परिसर गूंज उठा. इससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया. भगवान के जयकारे से वातावरण को आध्यात्मिक बन रहा था. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी भजन-कीर्तन में शामिल होकर भक्ति में लीन नजर आये. दिनभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और कार्यक्रमों का दौर चलता रहा.
सजे रथ पर निकली भगवान बालाजी की शोभायात्रा
शोभायात्रा में सजे-धजे रथ पर भगवान तिरुपति बालाजी की उत्सव प्रतिमा को विराजमान किया गया. पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों की टोली, भजन-कीर्तन मंडलियां और श्रद्धालुओं की लंबी कतार इस यात्रा की भव्यता को और बढ़ा रही थी. पादुका दर्शन से शोभायात्रा निकली, जिसके आगे-आगे आयोजन समिति के स्वागताध्यक्ष गौरव शर्मा और सशक्त फाउंडेशन के कार्यकर्ता नंगे पांव भगवान तिरुपति बालाजी का जयघोष करते चल रहे थे. जबकि महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में माथे पर कलश लेकर चल रहीं थीं. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया.
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्रीनिवास का हुआ दिव्य विवाह
योग नगरी मुंगेर के पादुका दर्शन में श्रीनिवास कल्याणोत्सव श्रद्धा और भक्ति के माहौल में भव्य रूप से संपन्न हुआ. इस विशेष धार्मिक आयोजन श्रीनिवास कल्याणम के दौरान भगवान विष्णु के अवतार श्रीनिवास (बालाजी) का विवाह माता लक्ष्मी की अवतार देवी पद्मावती के साथ वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के बीच दिव्य विवाह उत्सव के रूप में कराया गया. इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे. तिरुपति से आए विद्वान पंडितों ने वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के साथ कल्याणोत्सव संपन्न कराया. पूरे अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान के दिव्य विवाह उत्सव का साक्षी बने. जैसे ही विवाह की रस्में पूरी हुईं, पूरा परिसर भगवान के जयकारों से गूंज उठा. मंत्रों की गूंज और धार्मिक अनुष्ठानों की पवित्रता ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया.
बालाजी की प्रतिमा का एक झलक पाने को आतुर दिखे श्रद्धालु
योग नगरी मुंगेर के पोलो मैदान में भगवान तिरुपति बालाजी की उत्सव प्रतिमा दर्शन के लिए रखी गयी. जहां श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. पोलो मैदान में उत्सव प्रतिमा के दर्शन के लिए अपराह्न तीन बजे के बाद श्रद्धालु पहुंचने लगे थे. जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ती गयी, जो बालाजी की प्रतिमा का एक झलक पाने को आतुर थी. दूर-दराज से पहुंचे लोगों ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ भगवान के दर्शन किये और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. कई श्रद्धालु दर्शन कर भाव-विभोर हो उठे और इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया. स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने भगवान बालाजी की पूजा की. पूरे परिसर में भक्ति गीतों और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा. पोलो मैदान के जिस मंच पर भगवान बालाजी व माता की प्रतिमा रखी गयी थी. उसी मंच से कलाकार भजन कीर्तन प्रस्तुत करते रहे. दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ से लगातार भगवान तिरुपति बालाजी महाराज का जयकारा गुंजयमान होता रहा, जिसने माहौल को भक्तिमय कर दिया.
मुंगेर के लिए ऐतिहासिक व यादगार क्षण
पोलो मैदान में प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गयी थी, जिससे दर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. यह आयोजन मुंगेरवासियों के लिए एक अविस्मरणीय धार्मिक अनुभव बन गया. आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ना और समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाना है. यह आयोजन मुंगेर के लिए एक ऐतिहासिक और यादगार क्षण बन गया.
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