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इंदरूख बहियार: कही बाढ़ का पानी, तो कहीं सुखाड़ की हालत

Updated at : 13 Aug 2024 10:48 PM (IST)
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इंदरूख बहियार: कही बाढ़ का पानी, तो कहीं सुखाड़ की हालत

बाढ़ की विभीषिका से जमालपुर प्रखंड की पांच पंचायत जूझ रहे है, लेकिन प्रखंड की इंदरूख पंचायत पर कुदरत का कहर ढह रहा है.

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प्रतिनिधि, जमालपुर. बाढ़ की विभीषिका से जमालपुर प्रखंड की पांच पंचायत जूझ रहे है, लेकिन प्रखंड की इंदरूख पंचायत पर कुदरत का कहर ढह रहा है. हाल यह है कि पंचायत का आधा हिस्सा बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है तो आधे हिस्से में सुखाड़ के कारण खेतों में खरीफ फसलों की रोपनी तक किसान नहीं कर पाये. इंदरुख बहियार में करीब 200 बीघा खेत है. खेती के दृष्टिकोण से यहां के किसान निश्चित रूप से खुशहाल हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इस क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण सुखाड़ की स्थिति बनी हुई है. इस कारण किसानों द्वारा धान की रोपनी नहीं की जा सकी है. इतना ही नहीं कुदरत की मार से भी यहां के किसान पीड़ित हैं, क्योंकि इस बहियार में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. जिस कारण आधा बहियार में सुखाड़ है तो आधा बहियार बाढ़ के पानी में डूबा है.

सिंचाई का प्रबंध किया जाता, तो किसान होते खुशहाल

इंदरुख बहियार के किसान परमानंद सिंह, देवेश कुमार, विलास सिंह, विजय सिंह और विवेकानंद सिंह ने कहा कि यहां के किसान खेती के लिए पूरी तरह बारिश के पानी पर निर्भर हैं. प्रत्येक वर्ष बहियार में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाता है. इस कारण बहियार में भीठा छोड़कर पूरे बहियार में खरीफ का फसल नहीं हो पता है. किसानों ने कहा कि हर वर्ष इसी प्रकार की त्रासदी झेलनी पड़ती है, उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा इस क्षेत्र में पटवन की व्यवस्था कर दी जाये तो यहां के किसानों का पौ बारह हो सकता है. इतना ही नहीं, जिस पुल से होकर बाढ़ का पानी इस बहियार क्षेत्र में आता है. उस पुल पर फाटक लगा देने से बाढ़ की समस्या का समाधान निकल सकता है. जरूरत इस बात की है कि इस क्षेत्र के किसानों के बारे में उच्च स्तर पर निर्णय लिया जाये. इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ ही वरीय अधिकारियों को भी संज्ञान लेना होगा. इस मौसम में अबतक बारिश नहीं होने से किसानों में निराशा है.

रबी फसल के भरोसे किसान का घर-परिवार

क्षेत्र के किसानों का मानना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद इस बहियार के खेत तुरंत खेती योग्य तैयार नहीं हो पता है. ऐसे में रबी फसल भी प्रभावित होता है, फिर भी लोग रबी फसल के प्रति लोगों में आशा बनी हुई रहती है और इस फसल पर इस क्षेत्र के किसानों का भविष्य भी निर्भर करता है. एक फसल से पूरे वर्ष घर परिवार इस महंगाई के दौर में चलना संभव नहीं हो पता है. यही कारण है कि जिन किसानों के पास खेत है. उनके परिवार के लोग भी रोजी-रोटी के जुगाड़ में पलायन करने पर विवश हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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