एजेंसी के उत्तरपुस्तिका बारकोडिंग व रिजल्ट में देरी पर सीनेटर ने खड़े किये कई सवाल

मुंगेर विश्वविद्यालय के सीनेटर डॉ कुंदन लाल ने विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में बारकोडिंग करने और एजेंसी द्वारा रिजल्ट तैयार करने में हो रहे विलंब को लेकर विश्वविद्यालय पर कई सवाल खड़े किये हैं.
कुलपति को सौंपा ज्ञापन, मामले पर संज्ञान लेने का किया अनुरोध
मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय के सीनेटर डॉ कुंदन लाल ने विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में बारकोडिंग करने और एजेंसी द्वारा रिजल्ट तैयार करने में हो रहे विलंब को लेकर विश्वविद्यालय पर कई सवाल खड़े किये हैं. इसे लेकर उन्होंने कुलपति प्रो संजय कुमार को ज्ञापन भी दिया है.उन्होंने कहा है कि वर्ष 2025 के मध्य में आपके महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत मुंगेर विश्वविद्यालय में उत्तर पुस्तिकाओं के पुराने फॉर्मेट को बदलकर बारकोडिंग से लैस ओएमआर शीट वाली उत्तर पुस्तिकाओं को शुरू किया गया. इस दौरान आपकी तरफ से यह दावा किया गया कि नयी उत्तर पुस्तिकाओं के आने में परीक्षा परिणामों को जारी करने में त्वरित गति आयेगी. आपके द्वारा बताया गया कि जेम पोर्टल से निविदा की प्रक्रिया का सफलता पूर्वक निर्वहन किया गया और इस प्रकार विश्वविद्यालय की आगामी समस्त परीक्षाओं के लिए ओएमआर सीट वाली वाली नयी उत्तर पुस्तिकाओं को अंगीकार कर लिया गया. आपके तरफ से बार-बार यह कहा गया कि अब इन नयी उत्तर पुस्तिकाओं के आ जाने से परीक्षा परिणाम परीक्षा खत्म होने के दो महीने के अन्दर आ आयेंगे, परंतु बिना विधिक टेंडर की प्रक्रिया के ही आश्वाथ इको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पटना को इन उत्तर पुस्तिकाओं के बारकोडिंग और परीक्षा परिणामों का कार्य, पता नहीं कितने के प्रति स्टूडेंट की दर में सौंप दिया गया है, लेकिन परीक्षा की इतनी अवधि बीत जाने पर भी परीक्षा परिमाणों का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है, जबकि एक कुशल टीम को ओएमआर शीट में भी परिणाम बनाने में अधिकतम 15 दिनों का समय लगता है.
एजेंसी और विश्वविद्यालय के संबंधों पर भी उठाए सवाल
सीनेटर ने अपने ज्ञापन में संबंधित एजेंसी और विश्वविद्यालय के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाये हैं. सीनेटर ने कहा है कि इसी एजेंसी को पेमेंट गेटवे का कार्य भी दिया गया है. जिसके कारनामों को लेकर उनके द्वारा पूर्व भी दिये गये ज्ञापन में बताया गया था. ऐसे में अब यह समझ से परे है कि मुंगेर विश्वविद्यालय में इस कंपनी का यह रिश्ता क्या कहलाता है, जिसने हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को न सिर्फ विलंबित कर दिया है, बल्कि उनकी परीक्षा परिणामों की सटीकता पर भी प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया है.
एजेंसी पर खर्च करोड़ों रुपये को लेकर भी किये सवाल
सीनेटर ने अपने ज्ञापन में कहा है कि जिस परीक्षा परिणाम को विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग द्वारा अपने कर्मियों की मदद में बिना किसी अतिरिक्त खर्च और कम समय में पूरा कर लिया जाता था. उसे अब एक खास एजेंसी को लगभग करोड़ों रुपये पेमेंट कर भी इतने लंबे समय की अवधि बीत जाने पर भी पूरा नहीं किया जा सका है. साथ ही ओएमआर शीट वाली नयी उत्तर पुस्तिकाओं के रूप में भी विश्वविद्यालय का बड़ा व्यय कर दिया गया, सिर्फ एक सेमेस्टर की परिक्षा में लगभग एक करोड़ के अतिरिक्त व्यय का बोझ बढ़ाकर भी परिणाम का जारी न होना विद्यार्थी सहित विश्वविद्यालय के संसाधन के साथ भी घोर अन्याय है.
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