संस्कृत समाज की मुख्य धारा से दूर होती जा रही है : कुलपति

मुंगेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग एवं आरडी एंड डीजे कॉलेज द्वारा परिवार-प्रबंधन विषय पर आयोजित द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शुक्रवार को हो गया.
परिवार-प्रबंधन विषय पर द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग एवं आरडी एंड डीजे कॉलेज द्वारा परिवार-प्रबंधन विषय पर आयोजित द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शुक्रवार को हो गया. अंतिम दिन कार्यक्रम में कुलपति प्रो संजय कुमार मुख्य रूप से शामिल थे. संगोष्ठी में 135 प्रतिभागियों ने अपने-अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए. प्रतिभागियों ने परिवार-प्रबन्धन से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचारों व शोध-निष्कर्षों को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया. इस संगोष्ठी में देश के 25 विश्वविद्यालयों से प्रतिभागियों ने भाग लिया. संगोष्ठी में विद्वान, शोधार्थी, प्राध्यापकगण, विभाग के सभी छात्र तथा पूर्व छात्र भी शामिल रहे. कार्यक्रम में दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के पूर्व कुलपति प्रो उमेश शर्मा शामिल थे. अंतिम दिन पांच ऑफलाइन तथा एक ऑनलाइन मोड में सत्रों का संचालन किया गया. इन सत्रों में विचार-विमर्श एवं शोध-पत्र प्रस्तुति का क्रम निरंतर चलता रहा. समापन सत्र में मुख्य अतिथि ने कहा कि संस्कृत समाज की मुख्य धारा से दूर होती जा रही है. इसे बचाने के लिए संस्कृत दिवस आदि का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन संस्कृत विभाग के विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. प्रो शंभू दत्त झा ने कहा कि दर्शन संस्कृत से अलग नहीं है. संवाद नहीं है तो जीवन नहीं, अगर संवाद है तो जीवन है. संस्कृत और दर्शन का संस्कृत से संबंध बेहद निकट है. मौके पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो बिजेंद्र कुमार, डॉ भवेशचंद्र पांडेय, डॉ विश्वजीत विद्यालंकार, डॉ कृपाशंकर पांडेय सहित अन्य मौजूद थे.
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