निगम के आय के आंतरिक स्रोत पर पड़ रहा डाका, जिम्मेदार हैं मौन

Updated at : 27 Mar 2026 11:05 PM (IST)
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निगम के आय के आंतरिक स्रोत पर पड़ रहा डाका, जिम्मेदार हैं मौन

विवाह भवनों, मैरिज हॉल और लॉन को नगर निगम में पंजीकरण कराना अनिवार्य है. ताकि निगम को आंतरिक स्रोत से आय की प्राप्ति हो और शहर के विकास को रफ्तार मिल सके

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विवाह भवनों, मैरिज हॉल और लॉन संचालक खुद तो कमा रहे लाखों, निगम को ठेंगा

मुंगेर.

विवाह भवनों, मैरिज हॉल और लॉन को नगर निगम में पंजीकरण कराना अनिवार्य है. ताकि निगम को आंतरिक स्रोत से आय की प्राप्ति हो और शहर के विकास को रफ्तार मिल सके. लेकिन जिम्मेदारों के मौन समर्थन से निगम के आय के आंतरिक स्रोत पर संचालक डाका डाल रहे हैं. विवाह भवन, लॉन के संचालक खुद तो लाखों कमा रहे हैं, लेकिन निगम के खजाने में चवन्नी भी नहीं पहुंच रहा है.

निगम के पास मात्र 14 विवाह भवन ही निबंधित

मुंगेर शहर में 50 से अधिक मैरिज हॉल का संचालन हो रहे हैं. शहर के हर क्षेत्र में आपको छोटे-बड़े विवाह भवन देखने को मिल जाएंगे. इनको हर हाल में नगर निगम में निबंधित होना है. ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य है. लाइसेंस नहीं होने पर उसे निगम प्रशासन सील तक कर सकता है, लेकिन संचालक बिना निगम से ट्रेड लाइसेंस लिए ही मैरिज हॉल का संचालन कर रहे हैं. निगम सूत्रों की माने तो नगर निगम के रजिस्टर में मात्र 14 मैरिज हॉल ही निबंधित हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि शहर में अधिकांश मैरिज हॉल संचालकों के लिए नियम-कानून कोई मायने नहीं रखता है. इतना ही नहीं 30 से अधिक ऐसे हॉल हैं, जिन्हें राजनीतिक, गैर राजनीतिक व अन्य कार्यक्रमों के लिए भाड़े पर दिया जाता है.

पॉर्किंग की व्यवस्था नहीं, सड़कों पर लगता है जाम

इस समय मैरिज हॉल, बैंक्विट हॉल और धर्मशाला में शादी-विवाह के साथ ही अन्य उत्सव मनाने का ट्रेंड चल रहा है. इसके कारण हर साल मुंगेर शहर में 10 से 15 मैरिज हॉल की ओपनिंग हो रही है. यहां का किराया दो से ढाई लाख रुपये प्रति विवाह लिया जाता है. अगर सारी व्यवस्था करनी हो, तो उसका खर्च पांच से 10 लाख तक पहुंच जाता है. पर, ऐसे मैरिज हाल पर नियम कानून का कोई बंधन नहीं है. लेकिन इनके पास व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है. पार्किंग की व्यवस्था नहीं रहने से वाहन सड़कों पर पॉर्क होती है. जिससे विवाह भवनों, धर्मशाला, बैंक्विट हॉल के पास हमेशा जाम लगा रहा था. सुरक्षा की व्यवस्था है भी इनके पास नदारत है. संचालक खुद मालामाल हो रहे हैं और निगम को लाखों का चूना लगा रहे हैं.

नगर निगम को हो रहा लाखों का नुकसान

नगर निगम के जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण उसे प्रति वर्ष 25 लाख तक का नुकसान हो रहा है. निगम की मानें, तो एक से 10 लाख तक की कमाई करनेवाले होटल, मैरिज हॉल, बैंक्विट हॉल, धर्मशाला को मात्र 1000 रुपये सालाना ट्रेड लाइसेंस के लिए निगम में जमा करना है. 10 लाख से अधिक की कमाई करनेवालों को मात्र 2500 रुपये ही निगम को ट्रेड लाइसेंस के लिए एक साल में देना है. बावजूद इसके लाइसेंस लेने में मैरिज हॉल संचालक दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. मैरिज हॉल संचालक इन दिनों शादी-विवाह के लिए ठहरने, खाने, सजावट व अन्य तरह का ठेका ले लेते हैं. शहर में कई ऐसे बड़े मैरिज हॉल भी आज खुल गये हैं, जिनकी एक शादी की कमाई पांच लाख से ऊपर की है. पर, इनके लिए नियम-कानून मायने नहीं रखता, क्योंकि निगम प्रशासन का इनको मौन समर्थन प्राप्त है. इसके कारण निगम प्रतिवर्ष 25 लाख से अधिक का नुकसान हो रहा है.

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BIRENDRA KUMAR SING

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By BIRENDRA KUMAR SING

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