चार साल बाद भी पीजी विभागों को नहीं मिली पद की स्वीकृति
Author Prabhat khabar news desk
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मुंगेर विश्वविद्यालय के स्थापना का सात साल 18 मार्च 2025 को पूरा हो जायेगा. लेकिन विश्वविद्यालय इन सात सालों में नवसृजित विश्वविद्यालय ही बना है.
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मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय के स्थापना का सात साल 18 मार्च 2025 को पूरा हो जायेगा. लेकिन विश्वविद्यालय इन सात सालों में नवसृजित विश्वविद्यालय ही बना है. जहां लंबित कार्यों की सूची लगातार और लंबी होती जा रही है. एमयू को जहां चार साल में अपने 20 पीजी विभागों के लिए सरकार से पद सृजन की स्वीकृति नहीं मिल पायी है. वहीं वर्ष 2023 में पूर्व कुलपति प्रो. श्यामा राय के कुलाधिपति के समक्ष घोषणा के बाद भी अबतक पीजी विभागों को महानुभावों के चेयर का इंतजार है.
एमयू के लिए अपने अबतक के छह सालों की सबसे बड़ी उपलब्धि 20 पीजी विभाग और शोध की पढ़ाई आरंभ करना है. जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा 2021 में पीजी के 20 विभाग खोले गये. वहीं साल 2023 में पीएचडी की पढ़ाई आरंभ की गयी. लेकिन एमयू की उपलब्धि अबतक अधूरी है. क्योंकि पीजी विभाग बिना पद सृजन के ही चल रहा है. हद तो यह है कि बिना पद सृजन वाले पीजी विभागों में ही तीन सत्र भी समाप्त हो चुके हैं. जबकि एक सत्र समाप्ति की ओर चल रहा है. बता दें कि सरकार द्वारा विश्वविद्यालय के पहले कुलपति प्रो. रणजीत कुमार वर्मा के 12 पीजी स्कूलों के प्रस्तावों के अनुसार ही लगभग 115 पदों का सृजन किया गया. जिसे बाद में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पीजी स्कूलों की मान्यता नहीं होने के कारण स्थगित कर दिया गया और इन पदों को पीजी विभागों के लिए दे दिया गया. लेकिन लगभग तीन साल बाद भी अबतक सरकार से एमयू के 20 पीजी विभागों के लिए पद सृजन की स्वीकृति नहीं मिल पायी है.महानुभावों के चेयर का भी इंतजार
22 नवंबर 2023 को एमयू मुख्यालय में पहली बार एकेडमिक सीनेट की बैठक आयोजित की गयी थी. जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन कुलाधिपति सह राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने की थी. इस दौरान पूर्व कुलपति प्रो. श्यामा राय द्वारा हिंदी विभाग में रामधारी सिंह दिनकर, पॉलिटिकल साइंस में कर्पूरी ठाकुर तथा इतिहास में श्रीकृष्ण सिन्हा के नाम का चेयर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था. जिसकी खुद कुलाधिपति ने भी प्रशंसा की थी. लेकिन एकेडमिक सीनेट बैठक के बाद तीनों महानुभावों के चेयर स्थापित करने का मामला अबतक विश्वविद्यालय की फाइलों में धूल फांक रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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