सदर अस्पताल के दवा काउंटर पर 285 प्रकार की दवाओं में मात्र 120 दवाइयां ही उपलब्ध

Updated at : 19 May 2024 10:25 PM (IST)
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सदर अस्पताल में चिकित्सक भी बेरोक-टोक बाहरी दवा लिख रहे हैं.

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प्रतिनिधि, मुंगेर. करीब 16 लाख की जनसंख्या वाले मुंगेर सदर अस्पताल में बेहतर व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बीच मरीजों को अपने इलाज के लिए दवा तक बाहर से खरीदनी पड़ रही है. हाल यह है कि सदर अस्पताल के दवा केंद्र में 285 प्रकार की दवाओं में मात्र 120 प्रकार की दवाइयां ही उपलब्ध है, जबकि सदर अस्पताल में चिकित्सक भी बेरोक-टोक बाहरी दवा लिख रहे हैं. इस कारण मजबूरी में मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है. दवा काउंटर पर 285 प्रकार की दवाओं में मात्र 120 उपलब्ध. सदर अस्पताल के दवा काउंटर पर कुल 285 प्रकार की दवाइयां होनी हैं, लेकिन यहां मात्र 120 प्रकार की दवाइयां ही मरीजों के लिए उपलब्ध हैं. उसमें भी कई दवाओं की जगह चिकित्सकों द्वारा ब्रांडेड दवाओं का नाम लिखने के कारण मरीजों को दवा मुफ्त में नहीं मिल पा रही है. हद तो यह है कि अस्पताल के दवा काउंटर और ओपीडी में लगी दवाओं की सूची को नियमित रूप से अपडेट तक नहीं किया जाता है. इस कारण न तो मरीजों को दवा उपलब्ध होने की जानकारी मिल पाती है और न ही मरीज सरकारी सेवाओं का लाभ ले पाते हैं. इतना ही नहीं, कई बार अधिक भीड़ होने के बाद भी दवा काउंटर के कर्मी मरीजों को दवा नहीं होने की बात कहकर लौटा देते हैं. चिकित्सक लिख रहे ब्रांडेड दवाओं के नाम. नियमानुसार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को दवाओं के कंपोजिशन का नाम लिखना है, ताकि मरीजों को सुविधा अनुसार दवा मिल सके, लेकिन सदर अस्पताल के ओपीडी और वार्डाें में चिकित्सक धड़ल्ले से ब्रांडेड दवाओं का नाम मरीजों की पर्ची पर लिख रहे हैं, जो सदर अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को इन दवाओं को बाहर से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है, जबकि दूसरी ओर एक चिकित्सक ने बताया कि रोगी को बीमारी के अनुसार दवा की जरूरत होती है. जब अस्पताल में दवा नहीं है तो इलाज के लिए बाहर की दवा देना जरूरी होता है. कहते हैं सिविल सर्जन. सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि सदर अस्पताल में उपलब्ध दवा ही डॉक्टर को लिखना है. यदि बाहर से दवा मंगाने की आवश्यकता हो तो दवा का नाम लिखा जा सकता है. उन्होंने बताया कि दवाओं का सप्लाई बीएमआइसीएल से होना है. जिसे इंडेंट किया जाता है, लेकिन दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण दवा की सप्लाई नहीं हो पाती है. कहते हैं मरीज. सदर अस्पताल के रोगी मनोज यादव ने कहा कि चिकित्सक द्वारा चार दवाइयां लिखी गयी, लेकिन काउंटर पर 3 ही दवा मिल पायी. अब एक दवा बाहर से लेना होगा. सरकारी अस्पतालों में सभी प्रकार की दवाइयां होनी चाहिये. वहीं नजमा खातुन ने बताया कि मेरे जगह पुरुष वाले लाइन में मेरा भाई लगा था. जब वह काउंटर पर पहुंचा तो उसे कर्मियों द्वारा दवा देने से मना कर दिया गया और कहा गया कि महिलाओं वाली लाइन में लगकर दवा लें. वहीं जब मैं दवा लेने गयी तो मुझे तीन में केवल दो दवा ही दी गयी, जबकि दर्द का जो मलहम लिखा गया था. वह बाहर से लेने को कहा गया. रोगी सुधीर प्रसाद सिंह का कहना था कि मुझे चिकित्सक द्वारा तीन प्रकार की दवा लिखी गयी. इसमें दवा काउंटर पर बताया गया कि इबुप्रोफेन दवा नहीं है. जिसे बाहर से लेना होगा.

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