भागीचक गांव में जेसीजे के एनएसएस स्वंयसेवकों ने चलाया जागरूकता अभियान

Published by :RANA GAURI SHAN
Published at :29 Apr 2026 6:20 PM (IST)
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भागीचक गांव में जेसीजे के एनएसएस स्वंयसेवकों ने चलाया जागरूकता अभियान

भागीचक गांव के सामुदायिक विकास के लिए कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ चंदन कुमार के नेतृत्व में स्वंयसेवकों द्वारा जनजागरुकता अभियान संचालित किया गया.

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मुंगेर. जमालपुर कॉलेज जमालपुर एनएसएस इकाई द्वारा आयोजित विशेष शिविर के तीसरे दिन बुधवार को भागीचक गांव के सामुदायिक विकास के लिए कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ चंदन कुमार के नेतृत्व में स्वंयसेवकों द्वारा जनजागरुकता अभियान संचालित किया गया. जहां मुख्य अतिथि समाजशास्त्र के शिक्षक डॉ मुकेश कुमार के साथ डॉ अभिलाषा कुमारी, डॉ चंदा कुमारी, डॉ चंपकलता कुमारी, डॉ नेहा कुमारी, डॉ रिंकू राय आदि मौजूद थे. गांव में भ्रमण के लिए बने रूट चार्ट को फॉलो करते हुए भागीचक एवं रामनगर के गांव से गुजरते हुए स्वंयसेवकों का समूह मोर्चा चौक पहुंचा. जहां कैंप लगाया गया. गांव में अभियान के दौरान ‘शिक्षा स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास’ विषय पर स्लोगन आधारित नारे लगाए गए. एनएसएस पीओ ने कहा कि आज के मोबाइल युग में जब सूचना क्रांति के दौर में ज्ञान हमारे हाथों में आ गया है, तब भी गांव में शिक्षा के प्रति चेतना कम दिखाई देती है. क्षेत्रीय सरकारी संस्थानों में विद्वान शिक्षक हैं, लेकिन पढ़ाई के प्रति एकाग्रता कम हुई है. बच्चे मोबाइल में रील्स और वीडियो देखने में समय निकाल देते हैं. मोबाइल देर रात सोने की समस्या सामने आई है, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ा है. रील लाइफ के प्रति आकर्षण के कारण रियल लाइफ के प्रति बेरुखी बढ़ती जा रही है. जिससे जीवन के जरूरी साधनों और जिम्मेदारियों के प्रति भी अरुचि देखी गई है. लोग प्रदूषित वातावरण में जीते हैं मगर सामुदायिक रूप से पेड़ लगाने के लिए आगे नहीं आते. जंगल कट रहे हैं और तापमान में बढ़ोतरी के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं. हमारा गांव खेतिहर लोगों का इलाका है, लेकिन जैविक खेती को लेकर उदासीनता है. हमारा शरीर बाजारू पैकेटबंद भोजन से प्रभावित हो रहा है. ऐसे समय में स्वयंसेवक समाज को सामुदायिक रूप से विकसित बनाने के लिए रूपरेखा बनाया है. मुख्य अतिथि ने कहा कि भारत को गांवों का देश कहा जाता रहा है, लेकिन गांव विकास की धारा में पिछड़ता गया. दूसरी ओर शहरों में असंतुलित विकास है और भीड़ और प्रदूषण भी अधिक है. ऐसे में ग्राम टूरिज्म जैसे क्षेत्र विकसित हुए हैं और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए शहरी लोग गांव को गोद लेने की पहल कर रहे हैं. जनजागरूकता अभियान में स्वयंसेवक राजकुमार, प्रशांत, सोनू, मिट्ठू, शुभम, पीयूष, सन्नी, रोहित, कौशिक, छोटी, कोमल, कशिश, सोनी, प्रीति, नेहा, सुधा, अनीता, नित्या, ऋतु, मनीषा, पूजा, तनिषा, रश्मि, ब्यूटी, सुधांशु, सरस, राजनंदनी, मनी, अंशु, राखी, साजो, काजल, कुणाल, रिया, राहुल, सावित्री, निकिता, दिलशान, प्रियांशी, माही, महादेव, सन्नी, आयुष, धीरज ठाकुर, अल्ताफ राजा, अनुष्का, रानी, कोमल आदि शामिल थे.

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