सरकारी अस्पतालों में न सर्जन, न विशेषज्ञ चिकित्सक, बने हुए हैं रेफर सेंटर

Updated at : 06 Apr 2025 7:13 PM (IST)
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सरकारी अस्पतालों में न सर्जन, न विशेषज्ञ चिकित्सक, बने हुए हैं रेफर सेंटर

विश्व स्वास्थ्य दिवस आज

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विश्व स्वास्थ्य दिवस आज

प्रतिनिधि, मुंगेर.

सोमवार सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जायेगा. इसका उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है. इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम ”स्वस्थ शुरुआत, आशाजनक भविष्य” है. लेकिन मुंगेर जिले में तीन साल से बिना सर्जन के अधूरी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बीच सरकारी इलाज की सुविधा ले रहे लोगों के लिये आशाजनक भविष्य कैसा होगा, यह आसानी से समझा जा सकता है. जिले में न तो सरकारी स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य की सुविधा है और न ही जरूरतमंदों के लिए समुचित पैथोलॉजिकल जांच व दवा की व्यवस्था है. विशेषज्ञ चिकित्सक भी मुंगेर में नहीं हैं.

पिछले तीन साल से जहां मुंगेर जिला बिना सर्जन चिकित्सक के चल रहा है. वहीं इस दौरान मुंगेर में करोड़ों रुपये से स्वास्थ्य से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं का विकास हुआ है. लेकिन इसका समुचित लाभ मुंगेर के लोगों को नहीं मिल पा रहा. साल 2023 में जहां मुंगेर सदर अस्पताल को लगभग 32 करोड़ की लागत से बना 100 बेड का प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल और लगभग 17 लाख की लागत से बना 32 बेड वाला पीकू वार्ड मिला, लेकिन दो साल बाद भी प्री-फैब्रिकेटेड वार्ड में ओपीडी का संचालन हो रहा है. जबकि सदर अस्पताल के पुराने वार्डों में मरीज इलाज कराने को मजबूर है. इसके अतिरिक्त साल 2025 में लगभग 32 करोड़ की लागत से बने 100 बेड के मॉडल अस्पताल का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया, लेकिन अबतक हैंडओवर नहीं होने के कारण करोड़ों की बिल्डिंग मरीजों के लिए उपयोग में नहीं लायी जा रही है. इसके अतिरिक्त 90 लाख की लागत से जन्मजात पीड़ित बच्चों के लिए डीईआइसी सेंटर भी स्वास्थ्य विभाग को मिला, लेकिन उपकरण और व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां केवल डीईआइसी कार्यालय बनकर रह गया है.

बिना सर्जन व विशेषज्ञ चिकित्सक के स्वास्थ्य व्यवस्था

किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था में सर्जन की आवश्यकता काफी महत्वपूर्ण होती है. उसमें भी मुंगेर जैसे जिले जहां अपराध का ग्राफ अधिक है और जहां प्रतिदिन मारपीट, गन शॉट और सड़क दुर्घटना में लोग घायल होते हैं. यहां सर्जन होना अत्यंत आवश्यक है. इसके बावजूद मुंगेर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पिछले तीन सालों से बिना सर्जन के ही चल रही है. इसके कारण अधिकांश मामलों में घायलों को प्रखंडों से सदर अस्पताल तो भेज दिया जाता है, लेकिन सदर अस्पताल से भी मरीजों को हायर सेंटर के लिए भागलपुर या पटना भेज दिया जाता है. जिले में न्यूरो अर्थात मस्तिष्क और हृदय रोग के विशेष चिकित्सक तक नहीं हैं. इसके कारण इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को पटना या भागलपुर ही जाना पड़ता है. जबकि जिले में महिला चिकित्सकों की भी कमी है. इसके कारण महिलाओं का इलाज पुरुष चिकित्सक करते हैं. इससे महिलाएं इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान आने से कतराती हैं.

जांच व दवा वितरण की की स्थिति बदहाल

जिले के अधिकांश सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पैथोलॉजी जांच और दवा की व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है. सदर अस्पताल को छोड़कर जिले के अन्य प्रखंडों में जहां मरीजों को एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी भी जांच की सुविधा नियमित रूप से नहीं मिल रही है. वहीं सदर अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर यूरिन, विटामिन, स्टूल, कल्चर, थाइराइड जैसी जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके कारण मरीजों को निजी जांच केंद्रों में पैसे खर्च कर जांच करानी पड़ती है. कुछ ऐसा ही हाल दवाओं की उपलब्धता का भी है. इसके कारण मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है.

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ब्लॉक हेल्थ यूनिट की योजना भी रह गयी अधूरी

मुंगेर. वर्ष 2022 में सरकार ने मुंगेर जिले के चार प्रखंडों में ब्लॉक हेल्थ यूनिट के निर्माण की स्वीकृति दी. इसमें एकीकृत डाइग्नोस्टिक सुविधा मरीजों को मिलनी थी. एक ही छत के नीचे लोगों को सभी प्रकार की जांच की सुविधा मिलनी थी. साथ ही जिले में संचालित सभी स्वास्थ्य योजनाओं के लिएभी इसी भवन में कार्यालय होना था, ताकि लोगों को परेशान न होना पड़े. वहीं इस ब्लॉक हेल्थ यूनिट का निर्माण तारापुर, संग्रमापुर, खड़गपुर और धरहरा में होना था, लेकिन तीन साल बाद भी ब्लॉक हेल्थ यूनिट का निर्माण आरंभ नहीं हो पाया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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