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मुंगेर में पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय खोलने को लेकर न मिल रही जमीन, न अस्थायी भवन

Updated at : 22 Jun 2025 8:51 PM (IST)
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मुंगेर में पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय खोलने को लेकर न मिल रही जमीन, न अस्थायी भवन

शिक्षा की गुणवत्ता को निखारने के लिए केंद्र सरकार ने बिहार के 16 जिलों में पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय खोलने की हरी झंडी दी है, जिसमें मुंगेर शहर में इस विद्यालय का खुलना प्रस्तावित है.

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मुंगेर. शिक्षा की गुणवत्ता को निखारने के लिए केंद्र सरकार ने बिहार के 16 जिलों में पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय खोलने की हरी झंडी दी है, जिसमें मुंगेर शहर में इस विद्यालय का खुलना प्रस्तावित है. लेकिन विद्यालय के लिए न तो जमीन मिल पा रही है और न ही अस्थायी भवन ही जिला प्रशासन उपलब्ध करा पा रही है. इसके कारण मुंगेर के बच्चे केंद्रीय विद्यालय जैसी सुविधायुक्त शिक्षण संस्थान में पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं. हालांकि केंद्रीय विद्यालय जमालपुर के प्राचार्य संतोष चौधरी ने जिलाधिकारी अरविंद कुमार वर्मा से मुलाकात कर जमीन अथवा अस्थाई भवन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है.

मुंगेर शहर में प्रस्तावित है केंद्रीय विद्यालय

नवीन केंद्रीय विद्यालय के स्थापना के लिए बिहार राज्य के 16 जिलों में जगह प्रस्तावित किया गया है. जिसमें नालंदा में दो, पटना में दो, मुंगेर, पूर्णियां, मुजफ्फपुर, भोजपुर, गयाजी, भागलपुर, कैमुर, मधेपुरा, मधुबनी, शेखपुरा, दरभंगा और अरवल में एक-एक शामिल है. मुंगेर में जो जगह प्रस्तावित है, वह मुंगेर शहर है. लेकिन इस विद्यालय को दूर ले जाने की साजिश रची जा रही है. सूत्रों की माने तो विद्यालय के लिए 8 से 10 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती है. जिसमें विद्यालय भवन के साथ ही प्रशासनिक भवन, होस्टल, खेल मैदान, स्टॉफ क्वार्टर का निर्माण किया जाना है. इसके लिए जिला प्रशासन ने संग्रामपुर में पांच एकड़ जमीन को चिह्नित किया है. लेकिन पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय स्थापना को लेकर जिले में बनी टीम को यह जमीन रास नहीं आ रही है. टीम शहर में जगह उपलब्ध हो इसके लिए प्रयासरत है. विदित हो कि जमीन राज्य सरकार को ही उपलब्ध कराना है.

अस्थायी भवन मिलता तो शहर में शुरू हो जाता केंद्रीय विद्यालय

जानकारों की मानें तो मुंगेर शहर में विद्यालय भवन निर्माण के लिए जमीन जब तक नहीं मिलती, तब तक यह विद्यालय अस्थायी भवन में संचालित किया जा सकता है. जिला प्रशासन से ऐसा अस्थायी भवन उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है. जहां कम से कम 10 कमरा, प्राचार्य कक्ष, प्रशासनिक कक्ष एवं एक अन्य कक्ष की जरूरत पड़ती है. जहां तत्काल कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई का शुभारंभ कर दिया जाता. जानकारों की माने तो प्रति वर्ष एक क्लास में तब बढ़ोतरी होती जब जमीन पर विद्यालय भवन बनना शुरू हो जाता है. कुल मिलाकर कहा जाय तो अस्थायी भवन मेंं तत्काल विद्यालय शुरू होता और भवन बनने के बाद अस्थायी भवन में संचालित विद्यालय नये भवन में शिफ्ट कर दिया जाता है. इसके लिए जरूरी है कि जमीन और अस्थायी भवन शहर में ही मिले.

जमीन चयन से पहले इन बातों पर देना होगा ध्यान

केंद्रीय विद्यालय स्थापना को लेकर बनी टीम की माने तो जिस जमीन पर विद्यालय भवन बनेगा, वह किसी कीमत पर न तो अतिक्रमित हो और न ही विवादित हो. हाई टेंशन तार उस जमीन के पास-पास से गुजरी नहीं होनी चाहिए. साथ ही नदी-नाले के पास वह जमीन नहीं हो. स्कूल आने-जाने के लिए सुगम और पक्का रास्ता होना चाहिए.

केंद्रीय विद्यालय से जिले के बच्चों को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

देश में करीब 1300 केंद्रीय विद्यालय है. इन विद्यालयों को वैसे तो सेना व केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए शुरू किया गया था, लेकिन बाद में इन विद्यालयों की बढ़ती प्रतिष्ठा के बाद इन्हें स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता के लिए राज्यों की मांग के बाद इन्हें अन्य क्षेत्रों में आमलोगों के लिए भी खोल दिया गया. मौजूदा समय में सेना और केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों को दाखिला देने के बाद खाली सीटों पर आम बच्चों को प्रवेश दिया जाता है. केंद्रीय विद्यालय जमालपुर में कक्षा एक से प्लस टू तक की पढ़ाई होती है. जिसमें 16 सौ से अधिक बच्चे पढ़ाई करते हैं. अगर मुंगेर में भी विद्यालय खुल जाय तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाती.मुंगेर शहर में पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय खोलने की स्वीकृति प्रदान की गयी है. विद्यालय भवन निर्माण के लिए जमीन और तत्काल 1-2 से 5 तक की पढ़ाई प्रारंभ करने के लिए अस्थायी भवन उपलब्ध कराने के लिए जिलाधिकारी से मुलाकात की गयी है. जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि शीघ्र ही जमीन व अस्थायी भवन उपलब्ध करायी जायेंगी.

-संतोष चौधरी, प्राचार्य, केंद्रीय विद्यालय जमालपुरB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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