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आखिरकार जिंदगी की जंग में हार गया नक्सली बंदी बीडीओ कोड़ा, पीएमसीएच में हुई मौत

Updated at : 05 Feb 2026 8:19 PM (IST)
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आखिरकार जिंदगी की जंग में हार गया नक्सली बंदी बीडीओ कोड़ा, पीएमसीएच में हुई मौत

जुलाई 2022 से मुंगेर मंडल कारा में था बंद

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28 जनवरी से ही था बीमार, तीन फरवरी को पीएमसीएच में कराया गया था भर्ती

मुंगेर. आखिरकार जिंदगी की जंग में नक्सली बंदी बीडीओ कोड़ा उर्फ कारेलाल कोड़ा हार गया. चार फरवरी को इलाज के दौरान पीएमसीएच में उसने दम तोड़ दिया. वह मुंगेर मंडल कारा में जुलाई 2022 से बंद था. पटना में ही उसका पोस्टमार्टम कराया गया. बुधवार की देर रात उसका शव लड़ैयाटांड थाना क्षेत्र के पैसरा गांव में पहुंचा, जहां परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. इधर परिजनों ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया कि इलाज में विलंब के कारण उसकी मौत हो गयी.

3 फरवरी को भेजा गया था पीएमसीएच

जेल में बंद विचाराधीन बंदी लड़ैयाटांड थाना क्षेत्र के पैसरा गांव निवासी बीडीओ कोड़ा उर्फ कारेलाल कोड़ा कुछ दिनों से बीमार चल रहा था. जेल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, 26 जनवरी को उसने पेट में दर्द की शिकायत की. जेल अस्पताल में उसका इलाज कर दवा दे दी गयी,लेकिन 28 फरवरी को उसकी तबीयत फिर बिगड़ी, तो उसे कोर्ट के आदेश पर सदर अस्पताल भेजा गया.29, 30 और 31 जनवरी को लगातार उसे सदर अस्पताल भेज कर इलाज कराया गया. हर दिन इलाज के बाद उसे वापस जेल ले आया जाता था. एक फरवरी की रात उसकी तबीयत बिगड़ी, तो उसे फिर सदर अस्पताल भेजा गया, जहां उसको भर्ती कर लिया गया. मौके पर चिकित्सक ने हायर सेंटर में उसके इलाज की आवश्यकता बतायी. इसके बाद मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया और बोर्ड की रिपोर्ट पर न्यायालय के आदेश पर उसे तीन फरवरी को पीएमसीएच भेजा गया. पीएमसीएच में चार फरवरी की सुबह उसकी इलाज के दौरान मौत हो गयी.

शव पहुंचते ही परिजनों में मचा कोहराम

चार फरवरी बुधवार को ही नक्सली बंदी बीडीओ कोड़ा का पीएमसीएच में पोस्टमार्टम कराया गया. इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. बुधवार की देर रात बीडीओ कोड़ा का शव लड़ैयाटांड़ थाना क्षेत्र के पैसरा गांव पहुंचा, तो परिजनों ने कोहराम मच गया. पिता रामेश्वर कोड़ा, मां ननकी देवी, पत्नी ललपरिया देवी व उसके तीन बेटों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया. बीडीओ कोड़ा की पत्नी रोते-बिलखते कह रही थी कि हमलोग आस लगाये थे. जेल से निकलने के बाद वह परिवार का सहारा बनेगा, लेकिन उसकी अर्थी मेरे घर पहुंची.

साढ़े तीन साल से जेल में था बंद

2008 से ही बीडीओ कोड़ा उर्फ कारेलाल कोड़ा नक्सली संगठन से जुड़ा हुआ था और मुंगेर, लखीसराय व जमुई में दर्जनों नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया था. उसकी गिरफ्तारी 9 जुलाई 2022 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जे जगुनाथ रेड्डी के इनपुट पर हुई थी. उसे मुंगेर पुलिस व एसटीएफ ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के गौतम बुद्ध नगर मोहल्ला से गिरफ्तार किया. इसके साथ ही उसकी नक्सली प्रेमिका पोली कुमारी को गिरफ्तार किया गया था. उस पर सरकार ने 50 हजार का इनाम भी घोषित कर रखा था. गिरफ्तार कर मुंगेर लाने के बाद उसे न्यायालय के आदेश पर मुंगेर मंडल कारा भेज दिया गया था. तभी से वह जेल में बंद था. उस पर मुंगेर, जमुई, लखीसराय में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे. 16 मामला मुंगेर में दर्ज था, जिसमें से 6 में उसे न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन वर्तमान में वह 10 मामलों में जेल में बंद था.

कहती हैं जेल अधीक्षक

जेल अधीक्षक किरण निधि ने बताया कि तबीयत बिगड़ने पर नक्सली बंदी बीडीओ कोड़ा को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहां से उसे तीन फरवरी को बोर्ड की रिपोर्ट व कोर्ट के आदेश मिलने पर पीएमसीएच में भर्ती कराया गया. वहीं चार फरवरी की सुबह उसकी मौत हो गयी. पटना में ही शव का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया गया.

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BIRENDRA KUMAR SING

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By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

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