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Munger news : धान की खरीद नहीं पकड़ रही रफ्तार, अन्नदाता परेशान

Updated at : 29 Nov 2024 8:10 PM (IST)
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Munger news : धान की खरीद नहीं पकड़ रही रफ्तार, अन्नदाता परेशान

Munger news : धान खरीद की धीमी रफ्तार से किसान परेशान हैं और बिचौलियों के माध्यम से दूसरे राज्यों के किसानों को धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं.

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Munger news : जिले में 15 नवंबर से धान खरीद का कार्य शुरू हो गया है. पर, धान की खरीदारी अब तक रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है, क्योंकि कहीं पैक्स चुनाव के कारण धान खरीदारी का मामला अटका पड़ा है, तो कहीं पैक्स में ताला लटका हुआ है. इसके कारण किसान केंद्र पर धान बेचने नहीं पहुंच पा रहे हैं.

11 हजार में से मात्र 54 किसानों से खरीद

मुंगेर जिले में अब तक मात्र 444.020 एमटी धान की ही खरीद हो सकी है. धान खरीद की धीमी रफ्तार से किसान परेशान हैं और बिचौलियों के माध्यम से दूसरे राज्यों के किसानों को धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं. अन्नदाताओं को सम्मान और फसलों की सही कीमत मिले, इसके लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए धान की सरकारी खरीद और एमएसपी की व्यवस्था लागू की गयी, ताकि किसानों को उसके उत्पादन का उचित मूल्य मिल सके. सरकार ने साधारण धान का समर्थन मूल्य इस बार 2300 एवं ए ग्रेड धान का समर्थन मूल्य 2320 रुपये प्रति क्विंटल सरकार ने निर्धारित किया है. सरकार के पास धान बेचने के लिए 11 हजार 366 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. किसानों से उनकी पंचायत में ही धान खरीद की जिम्मेदारी जिले में 49 पैक्स और 03 व्यापार मंडलों को तत्काल दी गयी है. पर, इन 15 दिनों में मात्र 54 किसान ही क्रय केंद्रों तक पहुंचे, जिनसे 29 नवंबर की शाम तक 444.020 एमटी धान की खरीद हुई है.

कहीं चुनाव, तो कहीं शुरू नहीं हुई खरीदारी

किसान अपने उत्पादित धान बेचने के लिए परेशान हैं. पर, चयनित पैक्स और व्यापार मंडल में अधिकांश किसी न किसी कारण हमेशा बंद ही रहते हैं. सूत्रों की मानें, तो जिले में वर्तमान समय में पैक्स चुनाव हो रहा है. इसमें सहकारिता विभाग के जिला से लेकर प्रखंड स्तर के पदाधिकारी लगे हुए हैं. इसके कारण धान खरीद की प्रक्रिया पूरी तरह से सुस्त है. इतना ही नहीं चयनित कई पैक्स में ताला ही लटका रहता है. किसान केंद्र पर पहुंचते हैं, तो ताला लगा देख लौट जाते हैं. कारण, चयनित पैक्स धान की खरीद में रुचि ही नहीं ले रहे हैं. अब कारण चाहे जो भी हो, लेकिन पैक्स की उदासीनता के कारण जहां धान खरीद को रफ्तार नहीं मिल रही है, वहीं किसान परेशान हैं.

बिचौलियाें के हाथों किसान बेच रहे धान

किसानों की मानें, तो पैक्स और विभाग दोनों धान खरीदारी में उदासीनता बरत रहे हैं. नमी के नाम पर भी प्रति क्विंटल 05 किलो तक धान काट लिया जाता है. समय पर पैक्स की तरफ से भुगतान भी नहीं होता है. किसान नेताओं की मानें, तो बिहार सरकार ने इस बार बोनस तक की घोषणा नहीं की है, जबकि दूसरे राज्यों में सरकार किसानों को प्रति क्विंटल धान बेचने पर बोनस दे रही है. इन्हीं कारणों से परेशान किसान बिचौलियों के माध्यम से सरकारी दर से 100-200 रुपये अधिक दर पर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ के व्यापारियों को अपना धान बेच दे रहे हैं. क्योंकि वहां धान के प्रति क्विंटल पर सरकारी दर के अतिरिक्त बोनस भी दिया जा रहा है. मुंगेर समेत बिहार के अन्य जिलों से व्यापारी सस्ते दर पर धान खरीद कर अपने राज्य में महंगा बेच रहे हैं. किसानों की मानें तो वे घर से धान की खरीद कर ले जाते हैं. न धान पहुंचाना पड़ता है और न ही लोड करना करना पड़ता है. इस पर आनेवाला खर्च भी बच जाता है. पैसों का भुगतान भी ऑन द स्पॉट हो रहा है. यहां तो पैसों के लिए भी चक्कर काटना पड़ता है.

पैक्स चुनाव के कारण भी पड़ा है असर

जिला सहकारिता पदाधिकारी नवीन मोहन प्रसाद ने कहा कि पैक्स चुनाव के कारण धान खरीद का कार्य कुछ प्रभावित हुआ है, जबकि अभी बहुत सारे किसानों का धान खेत व खलिहान में ही पड़ा हुआ है. किसान जैसे-जैसे धान की तैयारी कर रहे हैं, वैसे-वैसे धान केंद्र पर दे रहे हैं. दिसंबर के दूसरे सप्ताह से धान खरीद रफ्तार पकड़ लेगी.

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Sharat Chandra Tripathi

लेखक के बारे में

By Sharat Chandra Tripathi

Sharat Chandra Tripathi is a contributor at Prabhat Khabar.

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