टूटती छत, उखड़ता प्लास्टर और गंदगी का अंबार, खंडहर में बदला मुंगेर बस स्टैंड

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टूटती छत, उखड़ता प्लास्टर और गंदगी का अंबार, खंडहर में बदला मुंगेर बस स्टैंड

मुंगेर सरकारी बस स्टैंड का जर्जर यात्री पड़ाव

Munger Bus Stand Condition: बस स्टैंड के यात्री पड़ाव और मुख्य भवन की स्थिति बेहद खराब है. प्रतीक्षालय की दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है, जबकि कई जगहों पर छत से सरिया तक बाहर दिखाई देने लगे हैं. छत से लगातार प्लास्टर टूटकर गिर रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. इसके बावजूद अब तक मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है.

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मुंगेर से वीरेंद्र कुमार सिंह की रिपोर्ट:

Munger Bus Stand Condition: शहर के किला मुख्य द्वार और एक नंबर ट्रैफिक के समीप स्थित सरकारी बस स्टैंड बदहाली की मार झेल रहा है. कभी यात्रियों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला राज ट्रांसपोर्ट का यह बस स्टैंड अब खंडहर में तब्दील हो चुका है. जर्जर भवन, टूटती छतें, उखड़ता प्लास्टर, टूटी बेंचें और चारों ओर फैली गंदगी यहां आने वाले यात्रियों और कर्मियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है.

छत से झड़ रहा प्लास्टर, कभी भी हो सकता है हादसा

बस स्टैंड के यात्री पड़ाव और मुख्य भवन की स्थिति बेहद खराब है. प्रतीक्षालय की दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है, जबकि कई जगहों पर छत से सरिया तक बाहर दिखाई देने लगे हैं. छत से लगातार प्लास्टर टूटकर गिर रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. इसके बावजूद अब तक मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है.

कार्यालय में पॉलिथीन लगाकर काम कर रहे कर्मचारी

राज ट्रांसपोर्ट के कर्मियों ने बताया कि भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि उन्हें कार्यालय के भीतर पॉलिथीन शीट लगाकर काम करना पड़ रहा है. बारिश होने पर छत से पानी टपकता है और प्लास्टर गिरने लगता है. कई बार कर्मचारी हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच चुके हैं. कर्मियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद केवल आश्वासन मिल रहा है.

बरगद के पेड़ के नीचे इंतजार करने को मजबूर यात्री

बस स्टैंड में बैठने की व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो चुकी है. अधिकांश बेंच टूट चुकी हैं और जो बची हैं, वे भी उपयोग लायक नहीं हैं. ऐसे में यात्रियों को परिसर में स्थित बरगद के पेड़ के नीचे खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है. गर्मी, उमस और बारिश के मौसम में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है.

गंदगी, दुर्गंध और अव्यवस्था से परेशान लोग

बस स्टैंड परिसर में जगह-जगह कूड़े-कचरे का अंबार लगा हुआ है. प्रतीक्षालय के फर्श पर गंदा पानी जमा रहता है और दुर्गंध के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. पीने के पानी, साफ शौचालय और नियमित सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है.

शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है परिसर

स्थानीय लोगों के अनुसार बस स्टैंड परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है. शाम ढलते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है, जिससे यात्रियों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों में असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है. लोगों का कहना है कि अंधेरा और जर्जर भवन किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है.

चारदीवारी बनी, लेकिन मूल सुविधाएं नहीं मिलीं

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग ने मुख्य भवन और यात्री पड़ाव की मरम्मत कराने के बजाय चारदीवारी निर्माण पर अधिक ध्यान दिया. लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं.

जीर्णोद्धार की उठी मांग

शहरवासियों और यात्रियों ने जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग से बस स्टैंड भवन के शीघ्र जीर्णोद्धार की मांग की है. लोगों का कहना है कि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो जर्जर भवन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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