छात्र समस्याओं को लेकर केवल प्लान बनाने तक ही सिमटा एमयू
Published by : AMIT JHA Updated At : 14 Feb 2026 7:13 PM
सीनेट बैठक में छात्र-छात्राओं की समस्याओं के निराकरण को लेकर सप्ताह में छात्र दरबार लगाने का निर्णय
दो साल पहले बना ग्रीवांस सेल फाइलों में ही सिमटा, अब छात्र दरबार का निर्णय
मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय में हुई सीनेट बैठक में छात्र-छात्राओं की समस्याओं के निराकरण को लेकर सप्ताह में छात्र दरबार लगाने का निर्णय लिया है. हालांकि एमयू का यह निर्णय छात्रों को कितना लाभ देगा, इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो साल पहले भी विश्वविद्यालय ने छात्रों की समस्याओं को लेकर ग्रीवांस सेल बनाया था, लेकिन यह सेल आज तक फाइलों से बाहर ही नहीं निकल पाया.बता दें कि सीनेट बैठक के दौरान सीनेट सदस्य विक्की आनंद ने विश्वविद्यालय में रिजल्ट, प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेजों को लेने के लिए कितना चक्कर लगाना पड़ता है. इसे लेकर मामला उठाया. इसमें सीनेट सदस्य ने बताया कि विश्वविद्यालय की लापरवाह कार्य प्रणाली के कारण स्नातक या पीजी उत्तीर्ण होने के बावजूद विद्यार्थियों को अपना मूल प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज लेने के लिए महीनों नहीं, बल्कि सालों तक चक्कर लगाना पड़ता है. ऐसे में विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रत्येक सप्ताह छात्र दरबार का आयोजन करे और छात्रों की समस्याओं का निराकरण करे. सीनेटर के इस प्रस्ताव को विश्वविद्यालय द्वारा पारित करते हुए प्रत्येक सप्ताह छात्र दरबार लगाने का निर्णय लिया गया है.
फाइलों से नहीं निकल पाया ग्रीवांस सेल
बता दें कि साल 2024 में भी एकेडमिक सीनेट की बैठक के दौरान सीनेट सदस्यों ने छात्र-छात्राओं की समस्याओं और उनकी परेशानियों को लेकर प्रश्न पूछा था. इसे लेकर विश्वविद्यालय द्वारा उस समय ग्रीवांस सेल का गठन किया गया था. इसे छात्र-छात्राओं की समस्या सुनने और उसके निराकरण की जिम्मेदारी दी गयी, लेकिन सेल गठन के बाद न तो विश्वविद्यालय में इसके लिए कोई अलग से कार्यालय बनाया गया और न ही ग्रीवांस सेल फाइलों से बाहर निकल पाया. हास्यास्पद तो यह रहा कि सालों तक ग्रीवांस सेल में अपनी शिकायत कैसे दर्ज करानी है. इसकी जानकारी तक विद्यार्थियों को नहीं दी गयी. अब ऐसे में विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने नये निर्णय छात्र दरबार को कितना कार्यान्वित कर सकता है. इसका तो केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है.
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