जमालपुर की श्री योगमाया बड़ी दुर्गा महारानी के दरबार में हर मुराद होती है पूरी, 200 साल से कायम है अटूट विश्वास

Edited by AMIT KUMAR SINH
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Yogmaya Durga Temple Jamalpur : रेल इंजन कारखाना बनने से भी पहले जमालपुर में विराजमान हुई थीं मां योगमाया बड़ी दुर्गा महारानी. मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है. यही वजह है कि हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंचकर सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं.

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मुंगेर के जमालपुर से विजय कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Munger News : मुंगेर जिले की रेल नगरी जमालपुर में स्थित श्री योगमाया बड़ी दुर्गा महारानी का मंदिर आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक शक्ति का अद्भुत केंद्र माना जाता है. पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन मंदिर परिसर में स्थित यह सिद्धपीठ करीब दो शताब्दियों से भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मंदिर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को एक दिव्य अनुभूति का एहसास होता है और मन स्वतः ही भक्ति भाव में डूब जाता है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां योगमाया अपने भक्तों पर सदैव कृपा बरसाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

रेल नगरी के बीचों-बीच विराजमान हैं मां योगमाया

शहर के मध्य स्थित श्री योगमाया बड़ी दुर्गा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जमालपुर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान भी है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को ऐसा अनुभव होता है मानो मां स्वयं अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए विराजमान हों. मंदिर का शांत वातावरण, भक्ति संगीत और श्रद्धालुओं की आस्था यहां आने वाले हर व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है. वर्षों से यह स्थान लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

1825 में हुई थी मां योगमाया की स्थापना

इतिहासकारों और स्थानीय जानकारों के अनुसार श्री योगमाया बड़ी दुर्गा की स्थापना सन 1825 ईस्वी में अनंत श्री विभूषित महंत प्रयाग दास उदासीन ने वेदांत और तांत्रिक पद्धति से की थी. यह स्थापना रेल इंजन कारखाना जमालपुर की स्थापना से लगभग 35 वर्ष पहले हुई थी. इससे स्पष्ट होता है कि मां योगमाया का यह सिद्धपीठ जमालपुर के विकास और इतिहास का अभिन्न हिस्सा रहा है. उदासीन संप्रदाय की परंपराओं से जुड़ा यह मंदिर आज भी अपनी प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को संजोए हुए है.

आरती के समय भक्तिमय हो उठता है पूरा परिसर

मंदिर में प्रतिदिन सुबह चार बजे से दोपहर बारह बजे तक तथा शाम चार बजे से रात नौ बजे तक श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था रहती है. दोपहर बारह बजे से शाम चार बजे तक माता विश्राम अवस्था में रहती हैं. सुबह और शाम की आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर मां के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठता है. श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. आरती के समय का आध्यात्मिक वातावरण भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित करता है और उन्हें मानसिक शांति का अनुभव कराता है.

मनोकामना पूर्ण होने की है गहरी मान्यता

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि मां योगमाया बड़ी दुर्गा अपने भक्तों की हर सच्ची प्रार्थना सुनती हैं. शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, विवाह और पारिवारिक सुख-समृद्धि जैसी विभिन्न कामनाओं को लेकर लोग यहां पहुंचते हैं. अनेक श्रद्धालु अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि मां की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं. इसी अटूट विश्वास के कारण बिहार सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

महंत डॉ मनोहर दास के नेतृत्व में हो रहा विकास

वर्तमान में मंदिर की व्यवस्था और विकास कार्य महंत डॉ. मनोहर दास के नेतृत्व में संचालित हो रहे हैं. उनके मार्गदर्शन में मंदिर परिसर के विकास, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार पर लगातार कार्य किया जा रहा है. धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों का भी आयोजन होता रहता है. मंदिर प्रबंधन का उद्देश्य इस ऐतिहासिक और सिद्धपीठ की गरिमा को बनाए रखते हुए इसे और अधिक विकसित करना है. यही कारण है कि श्री योगमाया बड़ी दुर्गा मंदिर आज भी श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र बना हुआ है.

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